Supreme Court Railway TTE :नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 37 साल बाद एक मृत रेलवे टिकट एग्जामिनर (TTE) को रिश्वत के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने उनके सम्मान की पुनर्स्थापना की और निर्देश दिया कि उनकी कानूनी उत्तराधिकारियों को सभी वित्तीय लाभ, जिसमें पेंशन भी शामिल है, तीन महीने के भीतर प्रदान किए जाएं, जिससे परिवार के लंबे कानूनी संघर्ष का अंत हुआ।
Supreme Court Railway TTE :VM Saudagar, जो दादर–नागपुर एक्सप्रेस में TTE थे, 1988 में यात्रियों से कुल 50 रुपये रिश्वत लेने और 18 रुपये का भाड़ा वापस न करने के आरोप में 31 मई 1988 को रेलवे सतर्कता टीम द्वारा जांच के दायरे में आए। इसके आधार पर विभागीय जांच शुरू हुई और 1996 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
Supreme Court Railway TTE : रिश्वत का आरोप और सबूतों की कमी
Supreme Court Railway TTE :जांच में ठोस सबूत नहीं मिले। यात्रियों की गवाही ने भी रिश्वत के आरोप का समर्थन नहीं किया। तीन यात्रियों में से दो ने कहा कि Saudagar ने कोई अवैध रकम नहीं मांगी और उन्होंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि वह रसीद जारी करेंगे और बाकी भाड़ा लौटाएंगे।
Supreme Court Railway TTE :CAT ने दी राहत, लेकिन मामला फंसा रहा
Supreme Court Railway TTE :2002 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने मामले की समीक्षा की और कहा कि बर्खास्तगी के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए Saudagar को बहाल किया जाए। लेकिन सरकार ने CAT के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसने ट्रिब्यूनल के फैसले को रोक दिया। इसके बाद मामला 15 साल तक हाई कोर्ट में अटका रहा, इसी दौरान Saudagar का निधन हो गया। 2017 में हाई कोर्ट ने CAT के आदेश को खारिज कर उनकी बर्खास्तगी को सही ठहराया।
Supreme Court Railway TTE :सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: ‘रिश्वत मांग का कोई प्रमाण नहीं’
Supreme Court Railway TTE :सुप्रीम कोर्ट ने पुराने मामले की समीक्षा के बाद पाया कि Saudagar पर लगे आरोप बेसबुन थे। जजों ने कहा कि जांच अधिकारी के निष्कर्ष भ्रामक और साक्ष्यों पर आधारित नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि सभी आरोप निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं और CAT ने सही निर्णय लिया था।
Supreme Court Railway TTE : 37 साल बाद सम्मान की वापसी
Supreme Court Railway TTE :घटना लगभग चार दशक पुरानी है। इतने सालों तक Saudagar का नाम बिना ठोस प्रमाण के भ्रष्टाचार के आरोपों से धूमिल रहा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके सम्मान को बहाल किया और कानूनी उत्तराधिकारियों को पेंशन और अन्य सभी वित्तीय लाभ तीन महीने के भीतर देने का आदेश दिया। परिवार के लिए यह लंबी और दर्दनाक कानूनी लड़ाई का अंत है—माना कि Saudagar इसे खुद नहीं देख पाए, लेकिन न्याय अब पूरी तरह हुआ।











