Sunday, September 20, 2026
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CG News : छत्तीसगढ़ में वन उपज और ग्रामीण आजीविका को नई दिशा: मुख्यमंत्री साय की कलेक्टर–डीएफओ बैठक

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर–डीएफओ संयुक्त कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के वन प्रबंधन, तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित, लघु वनोपजों के मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन), ईको-टूरिज्म, औषधीय पौधों की खेती और वनों से जुड़ी आजीविका के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई।

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तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए पारदर्शिता और प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक हितग्राहियों की संख्या आज 12 लाख से अधिक हो चुकी है, जो सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने वन अधिकारियों और कलेक्टरों को इसके लिए बधाई दी।

  • भुगतान में तेजी और पारदर्शिता: जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को भुगतान सात से पंद्रह दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, भुगतान की जानकारी एसएमएस के माध्यम से सीधे संग्राहकों के मोबाइल पर भेजी जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
  • डिजिटल पहल: बैठक में बताया गया कि लगभग 15 लाख 60 हजार संग्राहकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो चुकी है और सभी भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्रहण प्रक्रिया के पूर्ण कंप्यूटरीकरण की पहल को और तेज करने के निर्देश दिए।
  • समीक्षा और कार्ययोजना: बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिलों में पिछले सीजन में हुए तेंदूपत्ता संग्रहण की समीक्षा की गई और आगामी सीजन के लिए पूर्व-कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

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वन उपज का अधिकतम मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन)

मुख्यमंत्री ने वन उपज का अधिकतम वैल्यू एडिशन करने पर जोर दिया।

  • वन धन केंद्र: उन्होंने राज्य में वन धन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई, ताकि ग्रामीणों को अधिक आय के साधन मिल सकें और वे आत्मनिर्भर बनें।
  • लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स: लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और वन धन केंद्रों को सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके।
  • ब्रांड प्रमोशन: छत्तीसगढ़ हर्बल और संजीवनी ब्रांड के उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। इन उत्पादों की बिक्री ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों के लिए एक मजबूत मार्केट नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए गए।
  • जैविक प्रमाणीकरण: उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने पर बल दिया गया।

वन आवरण में वृद्धि और नई पहल

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में अब 46 प्रतिशत वन आवरण हो चुका है, जो लगभग दो प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने इस उपलब्धि में कैम्पा योजना और “एक पेड़ मां के नाम” जैसी अभिनव पहल का महत्वपूर्ण योगदान बताया।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती : वन मंत्री केदार कश्यप

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पहली बार वन अधिकारियों की बैठक आयोजित करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कलेक्टर और वन अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से कार्य करने को कहा, जिससे अत्यंत अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

  • ईको-टूरिज्म: उन्होंने बताया कि बस्तर और सरगुजा संभागों में विशेष रूप से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसे आजीविका से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
  • लघु वनोपज खरीदी: उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब 75 प्रकार की लघु वनोपजों की खरीदी करने जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
  • लाख उत्पादन: मंत्री कश्यप ने कहा कि लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है, और ठोस कार्ययोजना से प्रदेश प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है।

औषधीय पौधों की खेती के विस्तार की नई पहल

बैठक में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

  • विस्तार और सहयोग: प्रचार-प्रसार गतिविधियों को बढ़ाने और इसके लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले की सहायता लेने पर भी चर्चा की गई।
  • जिलेवार जानकारी: धमतरी, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिलों में औषधीय पौधों की खेती से संबंधित विषयों पर डीएफओ को विस्तृत जानकारी दी गई।
  • लाभ: बताया गया कि औषधीय पौधों की खेती न केवल आजीविका बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों के ज्ञान को भी आगे बढ़ाएगी। औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ ने इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर सभी संभागायुक्त, जिला कलेक्टर एवं वन मंडलाधिकारी उपस्थित थे।

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