रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में धान खरीदी के संबंध में ऐतिहासिक और अहम फैसला लिया गया। राज्य में लाख से अधिक किसानों से रुपये प्रति क्विंटल की दर से नवंबर से धान की खरीदी शुरू की जाएगी।
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भुगतान से दिन में, क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी
साय कैबिनेट ने किसानों के हित में कई बड़े निर्णय लिए:
- खरीदी अवधि: धान की खरीदी नवंबर से शुरू होकर जनवरी तक चलेगी।
- भुगतान गारंटी: किसानों को धान का भुगतान से दिन के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
- खरीदी सीमा: किसानों से क्विंटल प्रति एकड़ की अधिकतम सीमा तक धान की खरीदी की जाएगी।
टेक्नोलॉजी से खरीदी में पारदर्शिता
किसानों को सोसायटियों में लंबी कतारों से मुक्ति दिलाने और खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग अनिवार्य किया गया है:
- ऑनलाइन टोकन: ‘तुंहर हाथ’ मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत किसान स्वयं अपनी सुविधा के अनुसार दिन चुनकर टोकन काट सकेंगे।
- बायोमैट्रिक खरीदी: वास्तविक किसानों से ही धान की खरीदी सुनिश्चित करने के लिए इस वर्ष बायोमैट्रिक आधारित धान की खरीदी की जाएगी।
- ई-केवाईसी अनिवार्य: खरीदी में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन को ई-केवाईसी के माध्यम से अनिवार्य किया गया है, ताकि डुप्लीकेशन न हो। पंजीयन अक्टूबर तक कराया जा सकता है।
- डिजिटल क्रॉप सर्वे: लाख हेक्टेयर रकबे का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया गया है, और अक्टूबर से ग्रामों में इस डेटा को ग्रामसभा में पढ़कर सुनाया जा रहा है।
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मॉनिटरिंग और व्यवस्था पर फोकस
राज्य शासन ने धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और मॉनिटरिंग के लिए कई निर्देश दिए हैं:
- खरीदी केंद्र: खरीदी केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी और समितियों में समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
- प्रोत्साहन: समितियों को शून्य सूखत (Zero Wastage) आने पर रुपये प्रति क्विंटल के मान से प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- नियंत्रण केंद्र: धान की रिसाईकलिंग रोके जाने और बेहतर मॉनिटरिंग के लिए मार्कफेड कार्यालय में पहली बार इंटिग्रेटेड कमाण्ड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा। जिलों में भी कंट्रोल रूम बनेंगे।
- सीमा पर सख्ती: सीमावर्ती राज्यों से धान की आवक रोके जाने के लिए जिले स्तर पर विशेष चेकिंग दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टरों को धान खरीदी केंद्रों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को खरीदी केंद्र प्रभारी बनाने का निर्णय लिया गया है।











