निशानेबाज न्यूज़ डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। न्यूज एजेंसी Axios के हवाले से खबर सामने आई है कि दोनों देशों के बीच अगली वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कल होने जा रही है। बताया जा रहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी मुज्तबा खामेनेई ने इस बातचीत को हरी झंडी दे दी है।
इस्लामाबाद में कूटनीतिक कोशिश
इस्लामाबाद में प्रस्तावित यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका चाहता है कि जल्द से जल्द दूसरे दौर की शांति वार्ता हो, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव या धमकी के बीच बातचीत नहीं करेगा।
सीजफायर बढ़ाने की कोशिश
पाकिस्तान के मीडिया सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सीजफायर दो हफ्तों के लिए और बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान सीजफायर 22 अप्रैल तक लागू है और इसके खत्म होने से पहले इसे आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
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गालिबाफ का सख्त रुख
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह बातचीत को “सरेंडर टेबल” में बदलना चाहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो ईरान अपने स्तर पर जवाब देगा।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने भी तनाव को बढ़ाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर फिर बमबारी की जा सकती है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और गहरी हो गई है।
कूटनीतिक संपर्क जारी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की और अमेरिकी कदमों को उकसाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ईरान सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह तय करेगा कि वह वार्ता में शामिल होगा या नहीं।
अमेरिका पर अविश्वास कायम
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान ने भी स्पष्ट कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है। उनके अनुसार, सफल बातचीत के लिए वादों का पालन जरूरी है, लेकिन अमेरिका के हालिया कदम इसके विपरीत हैं।
आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता से कोई सकारात्मक परिणाम निकलता है या नहीं। यदि बातचीत सफल होती है तो यह क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन असफलता की स्थिति में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।











