Sunday, September 6, 2026
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Singrauli Sand Mafia: रात में ट्रैक्टरों से रेत का स्टॉक, सुबह हाईवा में भरकर भेजी जा रही खेप; फर्जी टीपी के इस्तेमाल की भी चर्चा

Singrauli Sand Mafia: सिंगरौली। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई के सरकारी दावों के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र के शासन गांव में बड़े पैमाने पर अवैध रेत भंडारण और परिवहन किए जाने की चर्चाओं ने एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार कांग्रेस से जुड़े दो बालू चोर नेता रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से विभिन्न घाटों और स्थानों से रेत लाकर एक निर्धारित जगह पर जमा की जाती है। इसके बाद सुबह होते ही उसी रेत को हाईवा वाहनों में लोड कर जिले और आसपास के क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। बताया जा रहा है कि इस परिवहन के दौरान वैधता दर्शाने के लिए कथित तौर पर फर्जी ट्रांजिट पास (टीपी) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह गतिविधियां कोई नई नहीं हैं और लंबे समय से संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि रातभर रेत का भंडारण और दिनभर परिवहन हो रहा है तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है, अथवा जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कारोबार से जुड़े लोग खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि समय-समय पर होने वाली कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। लोगों का मानना है कि यदि भंडारण स्थलों और परिवहन में लगे वाहनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

फर्जी दस्तावेजों की चर्चा से बढ़ी चिंता
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि रेत परिवहन के लिए कथित तौर पर फर्जी ट्रांजिट पास का उपयोग किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह मामला केवल अवैध परिवहन तक सीमित नहीं, बल्कि राजस्व चोरी और दस्तावेजों के दुरुपयोग से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं भी तेज
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पूरे कारोबार को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है। हालांकि इस संबंध में किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिर भी लगातार सामने आ रही चर्चाओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अवैध रेत भंडारण, परिवहन और कथित फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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