Gwalior News : ग्वालियर के हैंडमेड कालीनों पर अमेरिका का 50% टैरिफ, 15 हजार मजदूरों की रोज़ी-रोटी संकट में

Gwalior News : ग्वालियर /भूपेन्द्र भदौरिया : ग्वालियर के कालीनों को लगी अमेरिका के टैरिफ की नजर.. अमेरिका जाने वाले 70 करोड रुपए के कालीन के ऑर्डर रुके… काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर आया संकट…अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार के 50 फ़ीसदी घोषणा से भारत से निर्यात होने वाले हैंडमेड कालीन उद्योग पर मंदी के बादल जाने लगे हैं.. ग्वालियरके कालीन पार्क से हर साल 70 करोड रुपए के कालीन अमेरिका निर्यात होते हैं.. लेकिन 27 अगस्त से टेरिफ लागू होने की संभावना से एक्सपोर्ट ने ऑर्डर होल्ड कर दिए है ..

Gwalior News : पहले कालीन पर 2.4 फ़ीसदी टेरिफ था और अप्रैल में अमेरिका सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 फ़ीसदी कर दिया था.. 1 जुलाई से 25 फीसदी टेरिफ का आदेश दिया.. और 27 अगस्त से इसे बढ़ाकर 50 फ़ीसदी करने की धमकी से कालीन कार्यक्रम के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है.. इस वजह से कोई भी नया ऑर्डर लेने से मना कर दिया गया है..

Gwalior News : अब अगर यही हालात रहे तो कालीन उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे.. जिससे 15 हजार से अधिक मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा ..चंद्रप्रकाश प्रजापति का कहना है कि.. ग्वालियर के कालीन पार्क में हैंडमेड कालीन बनाई जा रही है ..जिनकी डिमांड भारत के साथ विदेश में भी है.. लेकिन अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ की घोषणा से विदेश में जाने वाले कालीन के नए ऑर्डर मिलना बंद हो गया है ..पहले है पहले 25% तक बढ़ाया जा चुका है… उसमें हम बड़ी मुश्किल में काम कर रहे थे.. लेकिन अब 50% लागू होने के बाद कालीन उद्योग पूरी तरह बंद हो जाएगा जिससे 15 हजार से अधिक मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा..

Gwalior News : कालीन पार्क में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि.. बचपन से हम कालीन बनाने का काम कर रहे हैं.. हाथों से बनाई हुई कालीन अमेरिका में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है.. लेकिन अमेरिका में टैक्स लगा दिया है.. जिससे कालीन बनाने के नए ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं..
हमारी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है.. ऑर्डर पूरी तरह बंद हो गए हैं ..जिस काम नहीं मिल पा रहा है..

Gwalior News : कालीन पार्क ग्वालियर मुरैना बाईपास रोड पर केंद्र सरकार की स्कीम के तहत 2011 में शुरू किया गया था.. इस प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार के द्वारा लगभग 22 करोड रुपए की राशि खर्च की गई.. लेकिन कालीन पार्क सफल नहीं हो पाया.. एक बार फिर सरकार के द्वारा कालीन पार्क को नया रूप देने की कोशिश की जा रही है.. ग्वालियर में राजशाही के दौर से कालीन उद्योग चल रहा है.. अंग्रेजों को कालीन काफी पसंद थी.. यही वजह है कि ग्वालियर के बने कालीनों की डिमांड विदेश में है..

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