Sona Comstar : संजय कपूर की विरासत पर जंग – मां रानी कपूर ने कंपनी पर हड़पने और धोखे का लगाया आरोप

Sona Comstar : नई दिल्ली — बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पूर्व पति और उद्योगपति संजय कपूर की अचानक मौत के बाद उनकी पारिवारिक विरासत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे विवाद ने एक नया मोड़ तब लिया जब उनकी मां रानी कपूर ने सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स लिमिटेड (Sona Comstar) के शेयरधारकों को एक पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए। इस पत्र के सामने आने के बाद उद्योग जगत और कॉर्पोरेट हलकों में हड़कंप मच गया है।

बंद दरवाज़ों के पीछे साइन कराए डॉक्युमेंट्स का आरोप

रानी कपूर ने अपने पत्र में लिखा है कि संजय कपूर की मृत्यु के बाद उन्हें गहरे मानसिक आघात की स्थिति में कुछ दस्तावेजों पर ज़बरदस्ती हस्ताक्षर करवाए गए, वो भी बंद कमरे में। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कंपनी के खातों और महत्त्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच से वंचित रखा गया। रानी कपूर ने कहा कि वह अपने दिवंगत पति की पंजीकृत वसीयत की एकमात्र लाभार्थी और बहुमत शेयरधारक थीं, बावजूद इसके उन्हें जानबूझकर फैसलों से दूर रखा गया।

“विरासत हड़पने की कोशिश” का दावा

रानी कपूर ने कहा कि उनके बेटे संजय कपूर के निधन के बाद, शोक की स्थिति में उनसे हस्ताक्षर कराए गए दस्तावेजों का अब दुरुपयोग करके कंपनी के संचालन और विरासत पर अनुचित दावा किया जा रहा है। उनका कहना है कि ये पूरा घटनाक्रम पारिवारिक संपत्ति को हड़पने की साजिश है।

कंपनी का बयान: “कोई कानूनी आधार नहीं”

रानी कपूर के आरोपों पर Sona Comstar ने जवाब देते हुए कहा है कि कंपनी ने सभी निर्णय कॉर्पोरेट कानून और रेग्युलेटरी दिशानिर्देशों के तहत लिए हैं। कंपनी के अनुसार, AGM से ठीक एक दिन पहले यानी 24 जुलाई की रात को यह पत्र मिला था, और कानूनी सलाह लेने के बाद बैठक स्थगित करने का कोई आधार नहीं मिला।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि रानी कपूर कंपनी के रिकॉर्ड में शेयरहोल्डर के रूप में लिस्टेड नहीं हैं, इसलिए उनसे परामर्श की कोई बाध्यता नहीं थी। AGM में संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

वरिष्ठ कॉर्पोरेट व उत्तराधिकार मामलों के वकील दिनकर शर्मा के अनुसार, भारतीय कानून के तहत शेयरधारक की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति सिर्फ संरक्षक होता है, अंतिम मालिक नहीं। असली मालिक वही होता है जो वसीयत या उत्तराधिकार के माध्यम से कानूनी दावेदार साबित हो।

उन्होंने कहा कि रानी कपूर का अगला कदम होना चाहिए कि वह अपने पति की वसीयत की प्रोबेट प्रक्रिया पूरी करें, जिससे वह कानूनी रूप से कंपनी के शेयरों पर दावा कर सकें और कंपनी के फैसलों को चुनौती देने की स्थिति में आ सकें।

एक सार्वजनिक कंपनी, एक पारिवारिक जंग

करीब 30,000 करोड़ रुपये की वैल्यू रखने वाली यह कंपनी अब एक पारिवारिक संघर्ष के केंद्र में है। एक तरफ रानी कपूर पारिवारिक विरासत और वसीयत के आधार पर अपना अधिकार जताने की कोशिश कर रही हैं, वहीं कंपनी का प्रशासनिक तंत्र कानूनी प्रक्रियाओं की दुहाई दे रहा है।

इस मामले का अगला अध्याय अब अदालतों में तय होगा — क्या रानी कपूर अपने बेटे और पति की विरासत वापस हासिल कर सकेंगी या यह लड़ाई एक लंबी कानूनी जंग का रूप ले लेगी, यह समय बताएगा।

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