MP Education Department: सीहोर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही! लाखों की सरकारी किताबें खुले में सड़ती मिलीं, तारामंडल परिसर बना ‘बुक डंपिंग ग्राउंड’

MP Education Department: सीहोर। मध्य प्रदेश सरकार जहां सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों तक निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पहुंचाने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं सीहोर से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के तारामंडल परिसर के बाहर विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली लाखों रुपये मूल्य की सरकारी किताबें खुले आसमान के नीचे लावारिस हालत में पड़ी मिलीं। धूप और बारिश के बीच सड़ती इन किताबों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तारामंडल परिसर के बाहर मिला किताबों का ढेर

मामला सीहोर के आवासीय खेलकूद संस्थान स्थित तारामंडल परिसर का है। यहां बड़ी संख्या में नई और उपयोग योग्य पाठ्य पुस्तकें खुले में बिखरी हुई मिलीं। कई किताबें बारिश के पानी में भीगकर खराब हो चुकी हैं, जबकि कई धूप और नमी के कारण फटने लगी हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि किताबें यहां एक-दो दिन से नहीं, बल्कि लंबे समय से पड़ी हैं और उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।

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जिन किताबों से बच्चों का भविष्य संवरना था, वे कबाड़ की तरह पड़ी रहीं

MP Education Department: सरकारी योजनाओं के तहत हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर विद्यार्थियों के लिए निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।लेकिन सीहोर में इन किताबों का जिस तरह रखरखाव किया गया, उसने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन पुस्तकों से बच्चों का भविष्य संवरना था, वे खुले मैदान में कबाड़ की तरह पड़ी-पड़ी खराब होती रहीं।

DEO ने साधी चुप्पी, सवालों से बचते नजर आए

मामले के सामने आने के बाद जब मीडिया ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) शीलू शर्मा से जवाब जानना चाहा, तो उन्होंने कैमरे पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

क्या किताबों को रद्दी में बेचने की थी तैयारी?

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि कहीं इन पुस्तकों को रद्दी के रूप में बेचने की तैयारी तो नहीं थी। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।फिलहाल यह केवल आशंका और सवाल हैं। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किताबें वहां किन परिस्थितियों में पहुंचीं और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग

MP Education Department: घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति की इस तरह अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

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शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

यह मामला केवल किताबों के खराब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संसाधनों के संरक्षण, शिक्षा विभाग की जवाबदेही और विद्यार्थियों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर हैं कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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