Monday, August 24, 2026
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दो दिग्गज, एक सम्मान… जब संजीव कुमार की अदाकारी ने जीत लिया दिलीप कुमार का दिल

Sanjeev Kumar Untold Story: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई बड़े कलाकार आए, लेकिन संजीव कुमार की अनकही कहानी उन्हें सबसे अलग बनाती है। उनकी अदाकारी इतनी सहज और असरदार थी कि अभिनय के शिखर पर बैठे दिलीप कुमार भी उनकी प्रतिभा की खुलकर तारीफ करते थे। कुछ किरदार ऐसे थे जिनके बारे में दिलीप कुमार ने साफ कहा था कि उन्हें केवल संजीव कुमार ही निभा सकते हैं। यही वजह है कि आज भी उनका नाम अभिनय के सबसे बेहतरीन कलाकारों में लिया जाता है।

संजीव कुमार की अनकही कहानी की शुरुआत रंगमंच से हुई। उनका असली नाम हरिभाई जेठालाल जरीवाला था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर में हर तरह के किरदार निभाए। खास बात यह रही कि युवा उम्र में भी वे बुजुर्गों की भूमिका इतनी सहजता से निभाते थे कि दर्शक उनकी उम्र का अंदाजा ही नहीं लगा पाते थे।बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर संजीव कुमार रखा और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। धीरे-धीरे उनकी अलग पहचान बनने लगी।

पहली मुलाकात में ही दिलीप कुमार हुए प्रभावित
संजीव कुमार की अनकही कहानी का एक अहम पड़ाव साल 1968 की फिल्म संघर्ष थी। इसी फिल्म में पहली बार उनकी मुलाकात दिलीप कुमार के साथ हुई। फिल्म में संजीव कुमार ने नकारात्मक भूमिका निभाई, लेकिन उनके अभिनय ने सभी का ध्यान खींच लिया।कहा जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान ही दिलीप कुमार ने महसूस कर लिया था कि यह कलाकार आने वाले समय में अभिनय की नई मिसाल बनेगा।

जब दिलीप कुमार ने खुद सुझाया संजीव कुमार का नाम
संजीव कुमार की अनकही कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह है जब कुछ फिल्मों के लिए पहले दिलीप कुमार से संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने खुद निर्माताओं और निर्देशकों से कहा कि इन किरदारों के लिए संजीव कुमार ज्यादा उपयुक्त रहेंगे।ऐसा ही किस्सा कोशिश और नया दिन नई रात जैसी फिल्मों से जुड़ा माना जाता है। इन फिल्मों ने आगे चलकर संजीव कुमार को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े कलाकारों में शामिल कर दिया।

‘कोशिश’ ने बदल दी अभिनय की परिभाषा
संजीव कुमार की अनकही कहानी में फिल्म कोशिश का जिक्र सबसे खास माना जाता है। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जो बोल और सुन नहीं सकता था।बिना ज्यादा संवादों के केवल चेहरे के भाव और शरीर की भाषा से उन्होंने जो अभिनय किया, उसने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों को हैरान कर दिया। इसी फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।बताया जाता है कि फिल्म देखने के बाद दिलीप कुमार ने कहा था कि इस तरह का किरदार निभाना हर किसी के बस की बात नहीं है।

एक फिल्म में निभाए नौ अलग-अलग किरदार

संजीव कुमार की अनकही कहानी केवल भावनात्मक अभिनय तक सीमित नहीं रही। फिल्म नया दिन नई रात में उन्होंने एक साथ नौ अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।हर किरदार का हावभाव, आवाज, चाल और व्यक्तित्व अलग था। उस दौर में यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी गई। लंबे समय तक यह रिकॉर्ड उनके नाम रहा।
‘शोले’ का ठाकुर आज भी अमर है
संजीव कुमार की अनकही कहानी की चर्चा शोले के बिना पूरी नहीं हो सकती। दिलचस्प बात यह है कि जब फिल्म रिलीज हुई, तब संजीव कुमार की उम्र धर्मेंद्र से भी कम थी। इसके बावजूद उन्होंने उम्रदराज ठाकुर बलदेव सिंह का ऐसा किरदार निभाया, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पात्रों में गिना जाता है।यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वे अपनी असली उम्र से बिल्कुल अलग किरदारों में भी पूरी तरह ढल जाते थे।

गुलजार के साथ बनी यादगार जोड़ी
संजीव कुमार की अनकही कहानी में निर्देशक गुलजार का योगदान भी अहम रहा। दोनों ने मिलकर परिचय, आंधी, मौसम और कोशिश जैसी कई क्लासिक फिल्में दीं।इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि संजीव कुमार सिर्फ बड़े स्टार नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार में जान डाल देने वाले कलाकार थे।

कम उम्र में दुनिया छोड़ गए, लेकिन अमर हो गए
संजीव कुमार की अनकही कहानी का सबसे दुखद अध्याय उनका असमय निधन है। 9 जुलाई 1938 को जन्मे संजीव कुमार महज 47 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए।हालांकि उनके जाने के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं। आज भी उनकी अदाकारी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए सीख मानी जाती है। शायद यही वजह है कि समय बदल गया, लेकिन संजीव कुमार की अभिनय कला आज भी उतनी ही ताजा और प्रेरणादायक महसूस होती है।

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