Chhattisgarh Education: रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के 35 विश्वविद्यालयों, जिनमें 15 शासकीय और 20 निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं, के साथ करीब 600 कॉलेजों में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं। लंबे समय से पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं आने से शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
रिक्त पदों का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। वहीं, निजी कॉलेजों में यूजीसी के निर्धारित मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई संस्थानों में विद्यार्थियों से पूरी फीस लेने के बावजूद पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है।
Chhattisgarh Education: परिनियम 28 के पालन पर उठे सवाल
निजी कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए ‘परिनियम 28’ का पालन जरूरी है। इसका उद्देश्य निर्धारित योग्यता वाले शिक्षकों, विशेष रूप से नेट, सेट या पीएचडी धारकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है। यूजीसी के सातवें वेतनमान के तहत सहायक प्राध्यापक का शुरुआती मूल वेतन 57,700 रुपये प्रतिमाह निर्धारित है।
हालांकि, आरोप है कि कुछ निजी संस्थान निर्धारित नियमों को दरकिनार कर कम वेतन पर शिक्षकों से सेवाएं ले रहे हैं। ऐसे संस्थानों में कथित तौर पर 25 से 35 हजार रुपये प्रतिमाह तक के वेतन पर शिक्षकों को नियुक्त किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार, नियमित भर्ती से बचने के पीछे शिक्षकों को निर्धारित वेतन और अन्य सुविधाएं देने की जिम्मेदारी से बचना एक वजह हो सकती है।
राज्यपाल के निर्देश के बाद भी भर्ती में तेजी नहीं
16 जुलाई 2025 को राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रमेन डेका ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के निर्देश दिए थे। उन्होंने समय पर नियुक्तियां नहीं होने को प्रदेश की शैक्षणिक गुणवत्ता में गिरावट से जोड़ते हुए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया था।
इसके बावजूद विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर कुलपतियों और कुलसचिवों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कॉलेजों की निगरानी की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होने के कारण निजी संस्थानों में नियमों के पालन को लेकर भी उसकी जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
रोजगार की तलाश में योग्य युवा
प्रदेश में बड़ी संख्या में नेट, सेट और पीएचडी धारक युवा रोजगार की तलाश में हैं। दूसरी ओर, कुछ कॉलेजों में कथित तौर पर पर्याप्त योग्य शिक्षकों के अभाव में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आ रही है। इससे विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
हाल ही में विधि संस्थानों में शिक्षकों की कमी के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी सख्त रुख अपनाया है। BCI ने छह सप्ताह के भीतर रिक्त शैक्षणिक पदों को भरने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त पदों को भरना और निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Chhattisgarh Education: मंत्री ने कहा- रिक्त पदों की जानकारी जुटाई जा रही
Chhattisgarh Education: उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों से रिक्त पदों की जानकारी मांगी जा रही है। उन्होंने कहा कि जो संस्थान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भर्ती नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. वीके गोयल ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं।





