MP Police Promotion: अभय मिश्रा \भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नति (DPC) को लेकर एक बार फिर हजारों पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा है। हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद जिस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था, उसे पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने अंतिम चरण में रोक दिया है। इससे प्रदेशभर के सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और कार्यवाहक डीएसपी सहित हजारों पुलिसकर्मियों का प्रमोशन फिर अधर में लटक गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अन्य विभागों में डीपीसी की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, तो आखिर गृह विभाग में ही प्रमोशन की फाइलों पर ब्रेक क्यों लग गया?
हाईकोर्ट की फटकार के बाद तेज हुई थी प्रक्रिया
MP Police Promotion: मऊगंज के एक सब-इंस्पेक्टर सहित कई पुलिस अधिकारियों ने कार्यवाहक उच्च पद का प्रभार नहीं मिलने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस रेगुलेशन के तहत कार्यवाहक प्रभार देने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
कोर्ट ने पुलिस मुख्यालय को 30 दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद PHQ ने जिलों और रेंज स्तर पर समितियां गठित कर पात्र अधिकारियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी थी।
2 जुलाई के आदेश ने रोक दी पूरी कवायद
MP Police Promotion: जब प्रमोशन की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली थी, तभी 2 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय ने नया आदेश जारी कर पूरी कार्रवाई को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया।PHQ ने अपने आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 30 जून के पत्र और विधिक राय का हवाला देते हुए प्रक्रिया रोकने की बात कही। इस फैसले से वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे पुलिस अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है।
183 कार्यवाहक DSP आज भी नियमित पदोन्नति के इंतजार में
MP Police Promotion: प्रदेश में फिलहाल 183 कार्यवाहक डीएसपी नियमित पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2024 में 183 निरीक्षकों को कार्यवाहक डीएसपी का प्रभार तो दिया गया, लेकिन नियमित डीपीसी नहीं होने से उनके नाम के आगे आज भी ‘कार्यवाहक’ शब्द जुड़ा हुआ है।इसका असर न केवल उनकी वरिष्ठता पर पड़ रहा है, बल्कि आगे की पदोन्नति और सेवा लाभ भी प्रभावित हो रहे हैं।
दूसरे विभागों में प्रमोशन, गृह विभाग में सन्नाटा
प्रदेश में MPPSC के माध्यम से सामान्य प्रशासन, राजस्व, स्कूल शिक्षा और अन्य विभागों में विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें लगातार हो रही हैं। कई विभागों में प्रमोशन सूची भी जारी की जा चुकी है।ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस गृह विभाग की जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है, वहीं पदोन्नति प्रक्रिया आखिर क्यों अटकी हुई है।
हजारों पुलिसकर्मियों में बढ़ी नाराजगी
MP Police Promotion: पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित पदोन्नति के कारण उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। कई अधिकारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित प्रमोशन का लाभ नहीं मिल सका है।उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जगी थी कि वर्षों का इंतजार खत्म होगा, लेकिन अंतिम समय में प्रक्रिया रुकने से फिर निराशा हाथ लगी है।
अब सरकार और PHQ के अगले फैसले पर नजर
फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर लगी रोक के पीछे प्रशासनिक और कानूनी कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में गृह विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।अब हजारों पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर सरकार और पुलिस मुख्यालय के अगले फैसले पर टिकी है। सभी को उम्मीद है कि लंबे समय से अटकी डीपीसी प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता साफ होगा।







