Panna Child Drowning Case: पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। ग्राम पंचायत बड़गड़ी की नई बस्ती में स्थित एक तलैया में डूबने से 8 वर्षीय मासूम रोहित गोंड की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में गहरा शोक फैल गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Panna Child Drowning Case: जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को रोहित अपने दोस्तों के साथ रोजाना की तरह गांव के पास स्थित तलैया में नहाने गया था। खेल-खेल में नहाते समय अचानक वह गहरे पानी में चला गया और देखते ही देखते डूबने लगा। साथ मौजूद बच्चों ने शोर मचाया, जिससे आसपास के ग्रामीण और परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मासूम रोहित की जान जा चुकी थी।
Panna Child Drowning Case: यह घटना और भी अधिक दर्दनाक इसलिए हो जाती है क्योंकि परिवार पहले से ही एक बड़े सदमे से गुजर रहा था। महज ढाई महीने पहले, इसी वर्ष 23 मार्च को रोहित की चचेरी बहन रिंकी की भी तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। इतनी कम अवधि में दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। घर में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।
Panna Child Drowning Case:गांव के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थित तालाब और तलैया के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह अभाव है। न तो कहीं चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही बैरिकेडिंग की कोई व्यवस्था है। इसी लापरवाही के कारण मासूम बच्चे अक्सर ऐसे जलस्रोतों की ओर आकर्षित हो जाते हैं और हादसों का शिकार बन जाते हैं।
Panna Child Drowning Case: ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि समय रहते जलाशयों के आसपास सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो शायद ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता था। लोगों ने मांग की है कि सभी खतरनाक जलस्रोतों के किनारे सुरक्षा दीवार, चेतावनी संकेत और निगरानी की व्यवस्था की जाए।
Panna Child Drowning Case: घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।
Panna Child Drowning Case: हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर कब तक मासूम बच्चे इस तरह की लापरवाही का शिकार बनते रहेंगे और प्रशासन कब तक केवल हादसे के बाद कार्रवाई करता रहेगा।









