Bastar Culture -Chapda Chutney: अगर कोई कहे कि खाने में लाल चींटियों की चटनी परोसी जाएगी, तो सुनकर हैरानी हो सकती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर में यह एक बेहद लोकप्रिय और पारंपरिक व्यंजन है। इसे ‘चापड़ा चटनी’ कहा जाता है, जिसका स्वाद चखने के लिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं।
Bastar Culture -Chapda Chutney: क्या है चापड़ा?
स्थानीय हल्बी भाषा में ‘चापड़ा’ का मतलब होता है पेड़ों की पत्तियों में रहने वाली लाल चींटियां। ये **वीवर एंट्स (Weaver Ants)** होती हैं, जो साल, महुआ और आम के पेड़ों पर पत्तों को जोड़कर घोंसला बनाती हैं।
कैसे इकट्ठा की जाती हैं चींटियां?
ग्रामीण लोग बांस की लंबी डंडियों की मदद से इन घोंसलों को पेड़ों से उतारते हैं। चींटियां काफी आक्रामक होती हैं और काटने पर तेज जलन होती है। इसलिए लोग खुद को बचाने के लिए शरीर पर राख भी लगाते हैं।
Bastar Culture -Chapda Chutney: कैसे बनती है चापड़ा चटनी?
* सबसे पहले चींटियों और उनके अंडों को साफ किया जाता है।
* फिर सूखी लाल मिर्च, लहसुन, अदरक, नमक और हरा धनिया सिलबट्टे पर रखा जाता है।
* इन मसालों के साथ लाल चींटियों और उनके अंडों को बारीक पीसा जाता है।
* इससे तैयार होती है लाल रंग की तीखी और खट्टी चटनी।
स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना
चापड़ा चटनी केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
* लाल चींटियों में मौजूद **फॉर्मिक एसिड** चटनी को प्राकृतिक खट्टापन देता है।
* इनमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, जिंक और विटामिन B-12 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
* आदिवासी समुदाय इसे सर्दी, खांसी, फ्लू और अन्य बीमारियों में लाभदायक मानता है।
Bastar Culture -Chapda Chutney: दुनिया भर में बढ़ रही पहचान
Bastar Culture -Chapda Chutney: बस्तर की यह पारंपरिक चटनी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रही है। कई मशहूर शेफ और पर्यटक इसका स्वाद चख चुके हैं। ओडिशा की लाल चींटी से बनने वाली ‘काई चटनी’ को जीआई टैग मिलने के बाद चापड़ा चटनी की चर्चा भी और बढ़ गई है।
Bastar Culture -Chapda Chutney: बस्तर जाएं तो जरूर चखें
Bastar Culture -Chapda Chutney: यदि आप बस्तर घूमने जाएं, तो चित्रकोट जलप्रपात देखने के साथ स्थानीय हाट-बाजार में मिलने वाली चापड़ा चटनी का स्वाद जरूर लें। इसका अनोखा स्वाद आपके सफर को यादगार बना सकता है।









