PMAY Corruption Allegations : बुरहानपुर/इच्छापुर। जिले की ग्राम पंचायत इच्छापुर से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक गरीब विधवा महिला, नजमा बी, ने ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच पति पर प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का लाभ दिलाने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का संगीन आरोप लगाया है। पिछले आठ महीनों से सरकारी दफ्तरों की चौखट घिस रही पीड़िता को न्याय के बजाय केवल अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
स्वीकृत आवास, फिर भी राशि का इंतजार इंदिरा नगर निवासी नजमा बी का मकान वर्तमान में जर्जर हालत में है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। पीड़िता के अनुसार, उनका प्रधानमंत्री आवास (ID: 105805052) स्वीकृत हो चुका है, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी उनके खाते में पहली किस्त की राशि नहीं पहुँची। आरोप है कि जब भी वह ग्राम पंचायत कार्यालय जाती हैं, तो सचिव विकास महाजन और सरपंच पति लक्ष्मण शंकर द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
रिश्वत की मांग और सामाजिक आक्रोश नजमा बी ने आरोप लगाया है कि उनसे सीधे तौर पर कहा गया कि “जब तक 10 हजार रुपये नहीं दोगी, तब तक पैसा नहीं आएगा।” सामाजिक कार्यकर्ता बीजू तड़वी भी इस मामले में पीड़िता के समर्थन में आए हैं। उन्होंने शासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गरीबों को अपना हक पाने के लिए रिश्वत देनी पड़े, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जिम्मेदारों के बयानों में अंतर्विरोध इस पूरे प्रकरण में जनपद सीईओ संजय सिंह का तर्क है कि एक परिवार में केवल एक ही आवास स्वीकृत होता है और नजमा बी के परिवार को पहले ही आवास मिल चुका है। हालांकि, सीईओ का यह बयान नए सवाल खड़े कर रहा है—यदि परिवार अपात्र था, तो आवास की आईडी (ID) कैसे सृजित हुई? और यदि पात्रता नहीं थी, तो कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग किस आधार पर की जा रही थी? इन विरोधाभासी बयानों ने भ्रष्टाचार के संदेह को और गहरा कर दिया है। फिलहाल, पीड़िता न्याय की उम्मीद में जिला प्रशासन की ओर देख रही है।









