Energy Conservation Negligence : जबलपुर। एक ओर जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे और अभियान चला रही हैं, वहीं संस्कारधानी जबलपुर के जिला प्रशासन मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) से लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकारी आदेशों की धज्जियां खुद ब्यूरोक्रेसी ही उड़ा रही है। दोपहर के लंच ब्रेक के दौरान कलेक्ट्रेट के कई कक्षों में कुर्सियां तो खाली नजर आईं, लेकिन बिजली के उपकरण—ट्यूबलाइट और पंखे—पूरी गति से चलते मिले।
नियमों की अनदेखी, जिम्मेदार मौन कलेक्ट्रेट परिसर, जहाँ से पूरे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था संचालित होती है और आम जनता के लिए ऊर्जा बचत के सर्कुलर जारी किए जाते हैं, वहीं के अधिकारी इस मुद्दे पर गंभीर नजर नहीं आ रहे। सूत्रों के अनुसार, यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह यहाँ का रोज का ढर्रा बन चुका है। अधिकारी और कर्मचारी अपने कक्षों में ताला लगाकर लंच पर निकल जाते हैं, लेकिन बिजली के स्विच बंद करना उनकी प्राथमिकता में शामिल नहीं है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील बेअसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण की वैश्विक अपील और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक निर्देशों का असर यहाँ की ब्यूरोक्रेसी पर होता नहीं दिख रहा। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुखिया लगातार फिजूलखर्ची रोकने और संसाधनों के सही उपयोग की बात कर रहे हैं। खाली कमरों में जलती लाइटें न केवल सरकारी धन की बर्बादी हैं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाती हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करेगा? यदि प्रशासन के शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदार ही नियमों की अवहेलना करेंगे, तो आम जनता से ऊर्जा बचत की उम्मीद करना बेमानी होगा। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन के आधिकारिक रुख का इंतजार है।









