Chhattisgarh RTE Digital Governance : गौरी शंकर गुप्ता/रायपुर: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (RTE) को लागू करने के लिए तकनीक का सहारा लेकर पारदर्शिता की नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अब निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इस क्रांतिकारी कदम से न केवल मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, बल्कि पक्षपात की संभावनाएं भी पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।
ऑनलाइन लॉटरी और डिजिटल सत्यापन: शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राप्त 38,439 आवेदनों में से 27,203 पात्र पाए गए, जिनमें से 14,403 बच्चों का चयन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित रैंडमाइज्ड ऑनलाइन लॉटरी के जरिए किया गया है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से दस्तावेजों की जांच और पात्रता की पुष्टि अब स्वचालित तरीके से होती है, जिससे अभिभावकों को अब स्कूलों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। वे घर बैठे मोबाइल के जरिए 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों की जानकारी ले सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं।
सामाजिक न्याय और APAAR ID की पहल: इस योजना के केंद्र में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे हैं। वर्तमान में प्रदेश के 3.63 लाख से अधिक विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। राज्य सरकार ने इस वर्ष 300 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया है। शिक्षा क्षेत्र को और आधुनिक बनाने के लिए छात्रों को 12 अंकों की विशिष्ट APAAR ID दी जा रही है, जो उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखेगी। मुख्यमंत्री की इस दूरगामी सोच से अब सुदूर ग्रामीण अंचलों तक शिक्षा का उजाला पहुंच रहा है।











