Sunday, September 27, 2026
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ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा! अब कोई सुलह नहीं, सीधा युद्ध…इस मुद्दे पर अटका शांति समझौता

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : ईरान और अमेरिका के बीच घोषित सीजफायर के बाद भी हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत एक बार फिर मुश्किल दौर में पहुंच गई है। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में शांति की राह अभी आसान नहीं है।

परमाणु कार्यक्रम पर नहीं झुक रहा ईरान

सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के सामने तीन चरणों वाला नया प्रस्ताव रखा था, लेकिन बातचीत का सबसे बड़ा विवाद संवर्धित यूरेनियम और परमाणु कार्यक्रम को लेकर सामने आया। ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बातचीत की शुरुआती शर्त नहीं बनाना चाहता, जबकि अमेरिका इसे सबसे अहम मुद्दा मान रहा है।

बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई और इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि यदि परमाणु मुद्दे को अलग रखकर बातचीत आगे बढ़ाई गई तो ईरान को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
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होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी वैश्विक चिंता

ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत दी जाती है तो होर्मुज स्ट्रेट को सामान्य व्यापार और तेल परिवहन के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। यही क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने होर्मुज स्ट्रेट को “आर्थिक परमाणु हथियार” बताते हुए कहा कि ईरान दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। इससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका और बढ़ गई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान पर बढ़ा दबाव

ब्लूमबर्ग समेत कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लगातार जारी अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है। तेल निर्यात प्रभावित होने से ईरान के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबे समय तक तेल कुओं का संचालन बंद रहा तो ईरान को भविष्य में उत्पादन दोबारा शुरू करने में महीनों लग सकते हैं। वहीं आवश्यक वस्तुओं और अनाज की सप्लाई पर भी असर पड़ने लगा है।

वैश्विक शक्तियों की बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधियों ने भी ईरान की परमाणु गतिविधियों और होर्मुज स्ट्रेट पर उसके रुख को लेकर चिंता जताई है। दूसरी ओर ईरानी नेताओं का कहना है कि वे अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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