BS Sponge Company: घरघोड़ा। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत नवापारा (टेंडा)-चारमार क्षेत्र में बीएस स्पंज कंपनी की 28 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में विरोध और समर्थन के बीच माहौल गरमाता जा रहा है। एक ओर कंपनी प्रबंधन जनसुनवाई की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों और किसानों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध का रुख अपनाया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कल होने वाली जनसुनवाई सफल होगी या ग्रामीणों का विरोध प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी करेगा? क्या जनसुनवाई में स्थानीय लोगों की वास्तविक सहमति और आपत्तियों को पर्याप्त महत्व मिलेगा या फिर धनबल के प्रभाव को लेकर उठ रहे आरोपों के बीच विवाद और गहराएगा?
युवाओं में आक्रोश, पहले विकास और रोजगार पर स्पष्ट जवाब की मांग
बीएस स्पंज कंपनी की प्रस्तावित परियोजना को लेकर क्षेत्र के युवाओं में रोजगार और विकास को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। युवाओं का कहना है कि उद्योग स्थापित होने से पहले कंपनी को स्थानीय लोगों के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण की स्पष्ट कार्ययोजना रखनी चाहिए।
स्थानीय युवाओं की मांग है कि कंपनी केवल रोजगार के आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार देने की लिखित नीति भी सार्वजनिक करे।
जल, जंगल और जमीन को लेकर ग्रामीणों की चिंता
प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि कंपनी और प्रशासन पर्यावरण संरक्षण के उपायों, जल उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा से संबंधित सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर उनके भविष्य और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
धनबल बनाम जनबल, कल होगा बड़ा फैसला?
जनसुनवाई से पहले क्षेत्र में समर्थन जुटाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
ऐसे में प्रशासन के सामने निष्पक्षता बनाए रखने और जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की बड़ी जिम्मेदारी है।
जनसुनवाई सफल होने के बाद भी जारी रह सकता है आंदोलन
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो जाने से उनकी समस्याएं समाप्त नहीं हो जाएंगी। यदि उनकी मांगों और आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और विरोध जारी रखेंगे।
आदिवासी नेता सोनू सिदार ने भी ग्रामीणों की मांगों के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति, अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना परियोजना को लेकर विवाद समाप्त नहीं होगा।
प्रशासन और कंपनी के सामने पांच बड़े सवाल
1. क्या स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की लिखित गारंटी दी जाएगी?
2. पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी कौन लेगा?
3. ग्रामीणों की भूमि संबंधी आपत्तियों का समाधान कब होगा?
4. क्या जनसुनवाई में ग्रामीणों की सभी आपत्तियां निष्पक्ष रूप से दर्ज की जाएंगी?
5. क्या कंपनी स्थानीय विकास के लिए अपनी स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करेगी?
कल की जनसुनवाई पर टिकी पूरे क्षेत्र की निगाहें
BS Sponge Company: 28 सितंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई अब केवल औद्योगिक परियोजना की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया नहीं रह गई है। यह स्थानीय रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, किसानों के अधिकारों और ग्रामीणों की भागीदारी से जुड़े कई सवालों का केंद्र बन गई है। अब देखना यह होगा कि कल जनसुनवाई में ग्रामीणों की कितनी भागीदारी होती है और उनकी आपत्तियों पर प्रशासन तथा कंपनी प्रबंधन क्या रुख अपनाते हैं। जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी ग्रामीणों का विरोध जारी रहता है या कंपनी उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल करती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।






