Wednesday, May 20, 2026
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Singrauli News: इलाज या कारोबार? सिंगरौली में निजी अस्पतालों पर शोषण के आरोप, वंदना हॉस्पिटल में बाथरूम के पास मरीज का इलाज, संक्रमण के खतरे को लेकर मरीजों की चिंता

Singrauli News: सिंगरौली। जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तेजी से बढ़ रहे निजी अस्पतालों के बीच अब कुछ संस्थानों पर मरीजों से आर्थिक शोषण, अव्यवस्था और सुविधाओं के अभाव के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि बेहतर इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचने पर उन्हें भारी बिल, असुविधाजनक व्यवस्था और संतोषजनक उपचार के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।

Singrauli News: मरीजों ने जिले के एक निजी अस्पताल, वंदना हॉस्पिटल, पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि अस्पताल द्वारा आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इलाज के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग बताई जा रही है। आरोप है कि अस्पताल में स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब है। कुछ मरीजों का कहना है कि शौचालय के समीप ही बेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है और वहीं ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बना रहता है। परिजनों ने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों के विपरीत बताया है।

Singrauli News: मरीजों ने डॉक्टरों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता और कई बार नाराजगी दिखाई जाती है। इससे मरीज और उनके परिजन मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को स्पष्ट जानकारी और संवेदनशील व्यवहार मिलना चाहिए।

आयुष्मान योजना में गड़बड़ी के आरोप
आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। मरीजों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उनसे पहले नकद राशि जमा कराई जाती है और बाद में कार्ड का उपयोग किया जाता है। यदि यह सही पाया जाता है, तो यह योजना के उद्देश्य के विपरीत है, क्योंकि आयुष्मान योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निशुल्क या कम लागत पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए लागू की गई है।

Singrauli News: दवाइयों के बिल पर भी उठे सवाल

Singrauli News: दवाइयों की बिलिंग को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। मरीजों का आरोप है कि महंगी दवाइयों का बिल बनाया जाता है, जबकि वास्तविक उपयोग कम दवाइयों का ही होता है। परिजनों का कहना है कि दवाइयों के उपयोग और बिलिंग में पारदर्शिता नहीं है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार संबंधित अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Singrauli News: स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही या आर्थिक शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले में निजी अस्पतालों की नियमित जांच हो रही है, आयुष्मान योजना का सही तरीके से पालन क्यों नहीं हो रहा और मरीजों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई कब होगी।

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