Balodabazar Liquor Shop Demand: जहां होती है शराबबंदी की मांग, वहां बलौदाबाजार के इस गांव ने क्यों मांगा सरकारी ठेका? जानें सच

Balodabazar Liquor Shop Demand: बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में जहां एक ओर ग्रामीण अंचलों, विशेषकर महिलाओं द्वारा शराब दुकानें बंद कराने और पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग को लेकर लगातार उग्र प्रदर्शन व आंदोलन किए जाते हैं, वहीं बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र से इसके बिल्कुल विपरीत और हैरान करने वाली विधिक व सामाजिक तस्वीर सामने आई है। यहां के ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्वयं सरकार और जिला प्रशासन से अपने गांव में एक वैध सरकारी शराब दुकान खोलने की गुहार लगाई है। इस अनोखी मांग के पीछे कोई शौक नहीं, बल्कि गांव को एक बड़ी सामाजिक विसंगति और विनाश से बचाने की विधिक छटपटाहट है।

अवैध महुआ शराब के आतंक से तंग आए ग्रामीण

यह पूरा दिलचस्प और अनोखा मामला बलौदाबाजार जिले की टुण्ड्रा तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नरधा का है। ग्राम नरधा इन दिनों पूरे प्रदेश के प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में अपने एक अभूतपूर्व ग्राम सभा प्रस्ताव को लेकर भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते 24 जून को पंचायत परिसर में आयोजित आधिकारिक ग्राम सभा की बैठक में भारी संख्या में मौजूद ग्रामीणों, पंचों और महिला स्व-सहायता समूहों ने सर्वसम्मति से शासन से गांव में एक ‘सरकारी कंपोजिट शराब दुकान’ (Government Composite Liquor Shop) खोलने की मांग का विधिक प्रस्ताव पारित किया है।

दरअसल, ग्रामीणों का विधिक और व्यावहारिक तौर पर कहना है कि उनके गांव और आसपास के आश्रित गांवों में लंबे समय से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध, जहरीली और घटिया महुआ शराब का निर्माण व कारोबार किया जा रहा है। गांव के गली-मोहल्लों में खुलेआम बिक रही इस अवैध कच्ची शराब के कारण गांव की युवा पीढ़ी और बड़ी संख्या में लोग इसकी गिरफ्त में आकर गंभीर रूप से नशे के आदी हो चुके हैं।

तबीयत बिगड़ने और आर्थिक नुकसान के बाद लिया कड़ा फैसला

ग्राम पंचायत नरधा के जनप्रतिनिधियों और जागरूक ग्रामीणों ने बताया कि इस अवैध महुआ शराब में की जाने वाली रासायनिक मिलावट और अत्यधिक विसंगतिपूर्ण निर्माण प्रक्रिया के कारण इसे पीने से कई स्थानीय लोगों की तबीयत लगातार गंभीर रूप से बिगड़ रही है। कई परिवार इस अवैध नशे के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और गांव का माहौल भी लगातार दूषित हो रहा था। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग को बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद जब इस अवैध विनिर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग सका, तो ग्रामीणों ने कानून के दायरे में रहकर यह अनोखा विधिक काउंटर-प्लान तैयार किया।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि गांव में शासन की देखरेख में एक विधिक और सरकारी कंपोजिट शराब दुकान खुल जाती है, तो लोग कम से कम इस जानलेवा अवैध महुआ शराब को पीने से बचेंगे, जिससे उनकी सेहत पर होने वाला जानलेवा खिलवाड़ रुकेगा। साथ ही, सरकारी दुकान खुलने से अवैध शराब का यह काला साम्राज्य और माफिया तंत्र अपने आप ध्वस्त हो जाएगा। ग्राम सभा द्वारा विधिवत पारित इस विधिक प्रस्ताव की प्रति अब जिला प्रशासन और आबकारी विभाग को आगामी दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है। इस फैसले ने समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को भी इस समस्या के एक नए पहलू पर सोचने के लिए विवश कर दिया है।

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