Thursday, August 20, 2026
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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: टिन्नू यादव का नाम बना ‘पास’! बिना चेकिंग निकलती थी कैश की गाड़ियां!

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर दान चोरी मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि दान गिनने वाले कुछ कर्मचारियों ने लंबे समय तक बेहद सावधानी से काम किया ताकि किसी को उन पर शक न हो। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

राम मंदिर दान चोरी मामला की जांच में सामने आया है कि आरोपी गणनाकर्मी गिनती के दौरान आपस में लगभग कोई बातचीत नहीं करते थे। वे एक-दूसरे की ओर भी कम देखते थे ताकि ऐसा लगे कि उनके बीच कोई खास पहचान नहीं है।जांच के अनुसार उनका व्यवहार पूरी तरह सामान्य रखा जाता था। केवल ड्यूटी खत्म होने के बाद या अलग समय पर ही वे आपस में मिलते-जुलते थे। इससे लंबे समय तक किसी कर्मचारी या अधिकारी को उन पर संदेह नहीं हुआ।

पहले से तय रहता था पूरा प्लान
राम मंदिर दान चोरी मामला में जांच कर रही टीम को जानकारी मिली है कि नकदी निकालने के बाद उसे कहां छिपाना है और बाहर कैसे ले जाना है, इसकी पहले से योजना बनाई जाती थी।बताया जा रहा है कि आरोपी कैश को बाथरूम या अन्य स्थानों पर छिपाकर रखते थे और बाद में सुरक्षा जांच से बचते हुए उसे बाहर निकालने की कोशिश करते थे। इन दावों की पुलिस और एसआईटी अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है।
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सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव भी जांच के घेरे में
राम मंदिर दान चोरी मामला की जांच के दौरान बैंक के एक कर्मचारी ने बताया कि शुरुआती समय में गिनती करने वाले कर्मचारियों की पूरी तलाशी ली जाती थी। उन्हें अलग कपड़े पहनाए जाते थे और कई स्तर की जांच के बाद ही काउंटिंग रूम में प्रवेश मिलता था।हालांकि बाद में यह व्यवस्था बदल गई। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सुरक्षा प्रक्रिया में बदलाव क्यों और किसके निर्देश पर किया गया।सूत्रों के मुताबिक, बैंक के एक कर्मचारी ने SIT को बताया कि मंदिर परिसर में चार लोगों का सबसे अधिक प्रभाव था—ट्रस्टी चंपत राय, अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और टिन्नू यादव। उसका दावा था कि टिन्नू यादव का नाम लेने पर परिसर में बिना रोक-टोक आवाजाही हो जाती थी और वॉकी-टॉकी होने के कारण वह कई बार मदद भी करता था।

काउंटिंग रूम में रहते थे कई कैमरे
राम मंदिर दान चोरी मामला में सामने आया है कि दान की गिनती 10 से अधिक CCTV कैमरों की निगरानी में होती थी। ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारी भी वहां मौजूद रहते थे।गिनती के दौरान पहले नोट और सिक्कों की अलग-अलग छंटाई होती थी। इसके बाद नोटों की गिनती, बंडल तैयार करना और सिक्कों को अलग पैक किया जाता था। पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड भी होती थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताएं कैसे हुईं, यही जांच का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।

कई चरणों से गुजरना पड़ता था
राम मंदिर दान चोरी मामला की जांच में यह भी सामने आया कि काउंटिंग रूम में जाने से पहले कर्मचारियों को कई सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता था।मुख्य गेट पर तलाशी, उपस्थिति दर्ज कराना, मोबाइल और निजी सामान लॉकर में जमा करना तथा विशेष ड्रेस पहनना अनिवार्य था। इसके बाद पहचान मिलान होने पर ही प्रवेश मिलता था।

जांच अभी जारी
राम मंदिर दान चोरी मामला में जांच एजेंसियां सभी बयानों, CCTV रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सबूतों की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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