नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। पार्टी के इस निर्णय को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जेपी नड्डा मॉडल पर की गई नियुक्ति
बीजेपी में कार्यकारी अध्यक्ष की परंपरा पहले भी देखी जा चुकी है। मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी पूर्ण अध्यक्ष बनाए जाने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में नितिन नबीन की नियुक्ति को भविष्य की बड़ी भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार और संगठन दोनों का लंबा अनुभव
45 वर्षीय नितिन नबीन के पास संगठन और सरकार दोनों का व्यापक अनुभव है। वे वर्तमान में बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे पार्टी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, जिससे वे केंद्रीय नेतृत्व की पसंद बने।
पांच बार के विधायक, बांकीपुर से मजबूत पकड़
नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। यह सीट बिहार की हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जाती है। उनकी चुनावी सफलता उन्हें जमीनी नेता के रूप में स्थापित करती है।
छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी भी रहे हैं नबीन
नितिन नबीन छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय में अहम योगदान दिया। इससे उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी पहचान मिली।
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कायस्थ समुदाय से आते हैं, सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं। उनकी नियुक्ति को सामाजिक संतुलन और संगठन में विविधता को मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। बीजेपी लगातार विभिन्न सामाजिक वर्गों को नेतृत्व में प्रतिनिधित्व देने की नीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विरासत और नई पीढ़ी का चेहरा
नितिन नबीन वरिष्ठ बीजेपी नेता नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं। राजनीतिक विरासत के साथ-साथ उन्होंने अपनी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता के बल पर अलग पहचान बनाई है।
पार्टी में बढ़ेगी नबीन की भूमिका
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की भूमिका पार्टी की नीति, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति में और महत्वपूर्ण हो जाएगी। माना जा रहा है कि 2025-26 के चुनावी समीकरणों में उनकी सक्रिय भूमिका देखने को मिलेगी।













