Monday, August 17, 2026
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Delhi High Court Order Teachers Salary : दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: निजी स्कूलों को भी देना होगा सातवें वेतन आयोग के समान वेतन

Delhi High Court Order Teachers Salary : नई दिल्ली (12 फरवरी 2026): दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि दिल्ली के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपने स्टाफ को सरकारी स्कूलों की तर्ज पर सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के अनुरूप वेतन और भत्ते प्रदान करने होंगे।

न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ का कड़ा रुख

न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम के तहत शिक्षकों को उचित वेतन देना स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने स्कूलों की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि “फीस नहीं बढ़ने के कारण वे सातवें वेतन आयोग का बोझ उठाने में असमर्थ हैं।” अदालत ने साफ किया कि वित्तीय संकट नियमों के उल्लंघन का आधार नहीं हो सकता।

दिवंगत शिक्षिका को मिला मरणोपरांत न्याय

यह मामला सुजाता मेहता नामक शिक्षिका से जुड़ा है, जिन्होंने 1984 से एक निजी स्कूल में अपनी सेवाएं दी थीं। साल 2019 में सेवानिवृत्ति के बावजूद उन्हें संशोधित वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया था। कानूनी लड़ाई के दौरान ही उनका निधन हो गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने अब आदेश दिया है कि शिक्षिका के कानूनी वारिसों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार उनके वेतन और अन्य सभी लाभों का पूरा बकाया (Arrears) जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।

शिक्षा जगत पर फैसले का प्रभाव

यह निर्णय दिल्ली के हजारों शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। इससे उन स्कूलों पर दबाव बढ़ेगा जो संसाधनों की कमी का हवाला देकर शिक्षकों को कम वेतन पर काम करवाते हैं। यह आदेश न केवल वेतन संरचना में समानता लाएगा, बल्कि निजी स्कूलों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

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