Saturday, August 15, 2026
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हिंदी-चीनी भाई-भाई! UN का स्थायी सदस्य बनने में भारत को ड्रैगन देगा समर्थन… दिल्ली में हुई हाई लेवल मीटिंग

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 निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू शामिल हुए। मा झाओक्सू भारत दौरे पर ब्रिक्स शेरपा बैठक में भाग लेने आए थे, जिसके दौरान यह द्विपक्षीय वार्ता हुई।

सीमा शांति और स्थिर संबंधों पर फोकस

दोनों देशों ने बातचीत के दौरान भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को संतुलित एवं स्थिर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए यह सहमति महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की पृष्ठभूमि में।

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UNSC सदस्यता पर सकारात्मक संकेत

बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार का मुद्दा भी उठा। चीन की ओर से यह संदेश दिया गया कि वह भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं को समझता और सम्मान करता है। इसे भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और लोगों के संपर्क पर चर्चा

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू किए जाने का मुद्दा उठाया और इसके दायरे को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई। दोनों पक्षों ने माना कि लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम होगा।

एयर सर्विस एग्रीमेंट और वीजा सुविधा पर सहमति

बैठक में एयर सर्विस एग्रीमेंट को जल्द अंतिम रूप देने, वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने तथा व्यापार, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों ने शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी समझ को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

गलवान के बाद धीरे-धीरे सामान्य होते रिश्ते

गौरतलब है कि गलवान घाटी विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी अब धीरे-धीरे कम होती दिख रही है। हाल के महीनों में संवाद की बहाली और सेवाओं के पुनः शुरू होने से रिश्तों में नरमी आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई और संवेदनशील मुद्दों पर आपसी चिंताओं को दूर करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारत-चीन वार्ता के ये संकेत आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक कूटनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

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