Tribal Status Probe Intensifies: मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक व कानूनी हलचल तेज हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण पत्र और सामाजिक प्रास्थिति (Social Status) की जांच अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है।
राज्य की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। समिति ने आगामी 7 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे नवा रायपुर स्थित ‘आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान’ में औपचारिक सुनवाई नियत की है।
सुनवाई की प्रक्रिया और सार्वजनिक मुनादी के निर्देश
उच्च स्तरीय समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए त्रिस्तरीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर: 7 अगस्त को होने वाली सुनवाई में जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन को अपने जाति संबंधी दावे के समर्थन में मूल दस्तावेज, वंशावली और साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा।
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क्षेत्र में सार्वजनिक मुनादी: समिति ने तहसीलदार मोहला को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नम्रता सिंह जैन के वर्तमान, पूर्व और स्थायी निवास क्षेत्रों में मुनादी कराई जाए। यदि किसी नागरिक या संस्था के पास दावे के समर्थन या विरोध में कोई प्रामाणिक दस्तावेज हैं, तो वे समिति के समक्ष पेश कर सकते हैं।
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डिजिटल व व्यक्तिगत उपस्थिति: पक्षकार चाहें तो सीधे नवा रायपुर पहुंचकर या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अपना पक्ष रख सकते हैं।
क्या हैं शिकायतकर्ताओं के आरोप?
नम्रता सिंह जैन के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद जिला पंचायत चुनाव के समय से ही चल रहा है। ‘सुशासन तिहार-2025’ के दौरान भी लिखित शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गलत तथ्यों के आधार पर एसटी प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा।
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वंशावली व मूल निवास पर सवाल: शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पिता नारायण सिंह (मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी) मूल रूप से ओडिशा के निवासी हैं।
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राजस्व रिकॉर्ड: शिकायत में यह भी कहा गया है कि मोहला क्षेत्र के पुराने राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) में परिवार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
ध्यान रहे कि जांच समिति ने अभी इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इन्हीं तकनीकी बिंदुओं की जांच प्रक्रियाधीन है।
संवैधानिक प्रावधान और वर्तमान कानूनी स्थिति
भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जनजाति का दर्जा राज्यवार और क्षेत्रीय वंशावली के आधार पर तय होता है। किसी भी जाति प्रमाण पत्र की वैधता का अंतिम निर्धारण केवल सक्षम उच्च स्तरीय छानबीन समिति ही दस्तावेजों और वंशावली के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद कर सकती है।
महत्वपूर्ण बिंदु: समिति द्वारा अभी केवल जांच प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वर्तमान स्थिति में नम्रता सिंह जैन का जाति प्रमाण पत्र निरस्त नहीं हुआ है और न ही समिति ने उन्हें दोषी ठहराया है। 7 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही समिति अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी।




