Katrina Kaif Body Shaming Issue: बच्चे के जन्म के बाद वजन बढ़ने पर ट्रोलिंग, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

VIKASH KHALKHO

मुंबई। Nishaanebaz.com-Katrina Kaif Body Shaming Issue: मुंबई के एंटीलिया में आयोजित गणेश चतुर्थी उत्सव में बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ अपने पति विक्की कौशल के साथ शामिल हुईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी प्रेग्नेंसी के पहले और बाद की तस्वीरों का ‘बिफोर-आफ्टर’ कोलाज बनाकर उनके शारीरिक बदलावों पर तीखी बहस और ट्रोलिंग शुरू हो गई। इससे पहले अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन को भी कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान उनके वजन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी निशाना बनाया गया था। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि हमारे समाज में महिलाओं के शरीर और उनके वजन को लेकर किस कदर संकीर्ण सोच और ‘फैटफोबिया’ व्याप्त है।

समाजशास्त्र में इस रवैये को ‘फैटफोबिया’ (Fatphobia) कहा जाता है, जो केवल एक व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नहीं है, बल्कि एक सामाजिक ढांचा है जो किसी व्यक्ति के शरीर के आकार के आधार पर उसकी योग्यता और गरिमा को तय करता है। भारतीय सिनेमा में भी दशकों से मोटे पात्रों को केवल हास्य का साधन बनाकर प्रस्तुत किया जाता रहा है। वर्ष 2025 में हुए एक शोध के अनुसार, फिल्मों में मोटे किरदारों का मजाक उड़ाना समाज में बॉडी शेमिंग (Body Shaming) को सामान्य बनाने का काम करता है, जिसके गंभीर मानसिक परिणाम सामने आते हैं।

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Katrina Kaif Body-Shaming Row Opens A Wider Debate On How Women Are  Expected To Look | Gujarat Samacharभारत में ‘इंटरनलाइज्ड वेट स्टिग्मा’ पर हुए अध्ययनों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बैरिएट्रिक सर्जरी कराने वाले मरीजों पर की गई स्टडी में पाया गया कि 71% से ज्यादा लोग अपने ही वजन को लेकर अंदरूनी नफरत महसूस करते थे, जबकि 74% लोग डिप्रेशन के शिकार थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वजन को लेकर तंज कसने की प्रक्रिया बचपन से स्कूलों में शुरू होती है और कॉर्पोरेट ऑफिसों तक चलती रहती है। दिल्ली-एनसीआर की मल्टीनेशनल कंपनियों में किए गए शोध से पता चला है कि वजन पर की जाने वाली टिप्पणियां कर्मचारियों में मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण बनती हैं।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि अब समाज को ‘हेल्थ एट एवरी साइज’ (HAES) के विचार को अपनाने की जरूरत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि स्वास्थ्य महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वजन घटाने के जुनून के बजाय संतुलित खान-पान और सभी आकार के शरीरों के प्रति सम्मानजनक देखभाल को बढ़ावा देना है। जब तक समाज किसी मां के बच्चे को जन्म देने के बाद आए शारीरिक बदलावों को स्वीकार करना नहीं सीखता, तब तक बॉडी शेमिंग के खिलाफ यह लड़ाई अधूरी ही रहेगी।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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