Saturday, September 19, 2026
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Raigarh Land Scam: 71 एकड़ पैतृक जमीन के नामांतरण में फर्जीवाड़ा! पटवारी और राजस्व अफसरों पर मिलीभगत का आरोप

Raigarh Land Scam: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाली घरघोड़ा तहसील से जमीन धोखाधड़ी का एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। तहसील के ग्राम चारमार के निवासी चिंतामणि गुप्ता और सरधाकर गुप्ता ने संभाग आयुक्त (डिविजनल कमिश्नर) को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर अपनी पैतृक भूमि के नामांतरण (Mutation) और उसकी रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर कूटरचना और फर्जीवाड़ा किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। आवेदकों ने इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

71.76 एकड़ पैतृक भूमि पर हक का दावा, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप

संभाग आयुक्त को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने ग्राम चारमार स्थित खसरा नंबर 5/5, 5/6, 1/2/2, 64/81, 64/82, 64/83, 64/84, 72/2, 86/24, 86/29, 86/30, 86/40, 103/2, 107/2, 113/2, 118/2, 151/2 एवं 172/2 सहित कुल मिलाकर लगभग 71.76 एकड़ पैतृक भूमि में अपना कानूनी हिस्सा होने का दावा किया है। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि पटवारी हल्का नंबर 18 के कुछ भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने अन्य बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर इस कीमती जमीन का अवैध रूप से नामांतरण कर दिया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बलेश्वर, बंशीधर और गजाधर नामक व्यक्तियों ने कथित रूप से राजस्व अभिलेखों (सरकारी रिकॉर्ड) में हेरफेर और जालसाजी कर भूमि को अपने और अपने परिजनों के नाम पर दर्ज करा लिया।

निजी कंपनी के संचालक को बिना सहमति बेच दी जमीन

चिंतामणि और सरधाकर गुप्ता ने अपनी शिकायत में यह भी विशेष रूप से रेखांकित किया है कि खसरा नंबर 86/29 और 86/30 की भूमि को पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेजों के सहारे एक निजी कंपनी के संचालक के पक्ष में बेच (रजिस्ट्री) भी दिया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उक्त बेची गई भूमि में उनका वैध रूप से आधा हिस्सा निहित है, बावजूद इसके उनकी जानकारी या लिखित सहमति के बिना इस सौदे को अंजाम दिया गया, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट की उच्चस्तरीय जांच कर उनका पैतृक अधिकार बहाल किया जाए। फिलहाल, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच शुरू होने के बाद ही इस पूरे जमीनी खेल का सच सामने आ सकेगा।

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