गोपाल देवकर /बुरहानपुर। परंपरा, संस्कृति और एकता के संगम “पंखुड़ी गरबा रास” का इस वर्ष भी बुरहानपुर में भव्य समापन हो गया है। गुजराती मोढ़ वणिक समाज द्वारा लगातार नौ वर्षों से आयोजित किया जा रहा यह आयोजन अब सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की पहचान और संगठन का प्रतीक बन चुका है।
| कार्यक्रम | आयोजक | स्थान | आयोजन दिवस |
| पंखुड़ी गरबा रास 2025 | गुजराती मोढ़ वणिक समाज | मंगल भवन वाडी, बुरहानपुर | दीपावली के बाद पड़वा, दूज और तीज |
उमड़ा देश-विदेश से समाजजनों का सैलाब
दीपावली के बाद पड़वा, दूज और तीज के शुभ दिनों में आयोजित हुआ पंखुड़ी गरबा रास इस साल भी अपनी पूरी रौनक पर रहा। मंगल भवन वाडी में सजे इस रंगारंग उत्सव में देश-विदेश से लौटे समाजजन एक साथ जुटे और गरबा की थाप पर झूम उठे। समाज अध्यक्ष रमेश दलाल ने बताया कि इस आयोजन ने समाज में नई ऊर्जा का संचार किया है।
करीब दो से तीन हज़ार लोगों की मौजूदगी में सजे इस गरबा रास ने बुरहानपुर की सांस्कृतिक पहचान को एक नई ऊँचाई दी। रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक संगीत और सामूहिक नृत्य ने पूरे माहौल को भक्तिमय और उल्लासमय बना दिया। पूर्व अध्यक्ष कमलेश शाह ने इसे समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण मंच बताया।
एकता और पारिवारिक मूल्यों का माध्यम
समाज सचिव एवं आयोजक उपेंद्रनाथ गुजराती ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि “यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की एकता, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम है।”
पूर्व उपाध्यक्ष अशोक शाह और सदस्य ललित शाह ने कहा कि नौ वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा पंखुड़ी गरबा रास अब समाज की श्रद्धा, भक्ति और संगठन का प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष यह उत्सव यह संदेश देता है कि परंपराएँ तभी जीवित रहती हैं जब युवा पीढ़ी उन्हें पूरे उत्साह के साथ अपनाती है और आगे ले जाती है।
इसी रंगारंग अंदाज़ में “पंखुड़ी गरबा रास” का इस वर्ष का अध्याय संपन्न हुआ। दीपावली के उत्सव से जुड़ा यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि जब परंपरा और आधुनिकता साथ चलें, तो समाज में एकता की रोशनी कभी मंद नहीं पड़ती।











