हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में सड़क निर्माण कंपनी पर 51.67 करोड़ रुपये का जुर्माना घटाकर मात्र 4,032 रुपये किए जाने का मामला चर्चा में है। यह प्रकरण करीब दो साल पुराना है और इसमें कई सवाल उठाए गए हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि इतनी कम कैसे हो गई।
दरअसल, 2023 में हरदा जिले में तत्कालीन अपर कलेक्टर प्रवीण फूलपगारे ने सड़क निर्माण कंपनी पाथ इंडिया को बिना अनुमति 3.11 लाख घन मीटर मुरम मिट्टी की खुदाई के लिए 51.67 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसमें 25.83 करोड़ रुपये जुर्माना और 25.83 करोड़ रुपये पर्यावरण क्षति के रूप में शामिल थे। कुछ समय बाद प्रवीण फूलपगारे का तबादला हुआ और IAS डॉ. बी. नागार्जुन गौड़ा हरदा के अपर कलेक्टर बने।
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नए अपर कलेक्टर ने कंपनी के जवाब और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद यह पाया कि कंपनी ने अनुमति प्राप्त खसरे पर खुदाई की थी। इसके बाद अवैध उत्खनन की मात्र 2,688 घन मीटर मात्रा के लिए 4,032 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया, जिसमें अवैध उत्खनन और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए क्रमशः 2,016 रुपये शामिल थे।
RTI कार्यकर्ता आनंद जाट ने इस मामले में आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त की और आदेश पर सवाल उठाए, साथ ही अधिकारियों पर रुपये के लेन-देन के आरोप लगाए। हालांकि, IAS डॉ. गौड़ा ने मीडिया को बताया कि आदेश पारित करते समय केवल दस्तावेज और अधिवक्ता के तर्क को ध्यान में रखा गया और किसी भी प्रकार के अवैध लेन-देन में उनका कोई हाथ नहीं है।

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हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने स्पष्ट किया कि तत्कालीन अधिकारी ने मजिस्ट्रेट के रूप में आदेश जारी किया था और यदि किसी को आपत्ति हो तो वह अपील कर सकता है। उन्होंने कहा कि नोटिस के बाद सुनवाई और तथ्यों के आधार पर ही आदेश पारित किया गया।
इस मामले में एक ग्रामीण ने सुनवाई न होने पर एनजीटी में मामला दायर किया था। एनजीटी ने करीब 3.5 करोड़ रुपये का जुर्माना पाथ कंपनी पर लगाया और अधिकारियों से लेन-देन के आरोपों की जांच के लिए ईडी को निर्देशित किया। इस आदेश के खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जहां मामला अभी लंबित है।
एक और तथ्य यह है कि इस प्रकरण को शुरू में विविध मद (B 121) में दर्ज किया गया था, जबकि नियमानुसार इसे खनिज मद (A 67) में दर्ज किया जाना चाहिए था। इस गलती से भी मामले की प्रक्रिया प्रभावित हुई।




