Balaghat Rice Scam: मध्य प्रदेश के बालाघाट में सामने आए कथित चावल घोटाले की जांच के दौरान एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच टीम ने हर्ष राइस इंडस्ट्रीज के संचालक राजकुमार कावरे को गिरफ्तार किया है। राजकुमार कावरे प्रदेश के पूर्व मंत्री और वर्तमान बीजेपी जिला अध्यक्ष रामकुमार कावरे के बड़े भाई बताए जा रहे हैं। इस मामले में इससे पहले भी कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
राइस मिल संचालक पर कार्रवाई
जांच के दौरान हर्ष राइस इंडस्ट्रीज का नाम सामने आया था। इस राइस मिल का संचालन राजकुमार कावरे से जुड़ा बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी चावल की कथित हेराफेरी के मामले में इस मिल की भूमिका की जांच की जा रही है।इससे पहले हर्ष राइस इंडस्ट्रीज से जुड़े पार्टनर विनोद शर्मा और अविनाश कावरे को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। अब राजकुमार कावरे की गिरफ्तारी से मामले की जांच आगे बढ़ने की संभावना है।
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2000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
एसआईटी ने शनिवार, 19 सितंबर को वारासिवनी न्यायालय में करीब 2000 पन्नों की चार्जशीट पेश की। जांच में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी से जुड़े कई लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।चार्जशीट में एथेनॉल प्लांट से जुड़े कर्मचारियों, परिवहन कारोबारियों और राइस मिल संचालकों के बीच कथित सांठ-गांठ की बात सामने आने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, सरकारी चावल को तय स्थान तक पहुंचाने के बजाय दूसरे ठिकानों पर भेजे जाने और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।
इन लोगों के नाम भी सामने आए
जांच में एवीजे एथेनॉल प्लांट के राहुल प्रताप, सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव और ट्रांसपोर्टर उबेद खान की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। एसआईटी की चार्जशीट के अनुसार, इन लोगों पर कथित तौर पर पूरी योजना में शामिल होने के आरोप हैं।मामले में जांच एजेंसी ने दस्तावेजों, परिवहन और चावल की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की है। इसी जांच के आधार पर अब तक कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
कैसे सामने आया मामला?
मामला रियायती दर पर उपलब्ध कराए गए फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, यह चावल एथेनॉल प्लांट तक पहुंचाया जाना था। आरोप है कि चावल निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बजाय निजी राइस मिलों तक पहुंच गया।जांच के मुताबिक, इसके बाद इसी चावल को दोबारा सरकारी गोदामों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की जांच के दौरान ऐसे 17 ट्रक पकड़े जाने की बात सामने आई थी।
500 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा
बालाघाट के इस कथित चावल घोटाले की रकम करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, घोटाले की अंतिम राशि और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।एसआईटी की कार्रवाई और अदालत में दाखिल चार्जशीट के बाद अब मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।







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