MP में बदलेंगे अनुकंपा नियुक्ति के नियम, नौकरी खत्म करना होगा मुश्किल, मोहन सरकार कर रही नई तैयारी

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CM Mohan Yadav
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MP Compassionate Appointment Rules: एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम में मध्यप्रदेश सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इन नियमों को अधिक आसान और शासकीय कर्मचारियों तथा अधिकारियों के परिवारों के हित में बनाने पर विचार किया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने बदलावों का मसौदा तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही राज्य कैबिनेट के सामने पेश किया जा सकता है।सरकार का उद्देश्य अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है, ताकि कर्मचारी की मृत्यु या विशेष परिस्थितियों में परिवार को समय पर सहायता मिल सके।

एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम में प्रस्तावित बदलावों के अनुसार बिना किसी गंभीर कारण के किसी कर्मचारी को अनुकंपा नियुक्ति से हटाना आसान नहीं होगा। इससे उन परिवारों को सुरक्षा मिलेगी जो अपने परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से गुजरते हुए इस नौकरी पर निर्भर हैं।पहले कुछ मामलों में नौकरी समाप्त करने को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से विवाद की स्थिति बनती थी। नए बदलावों से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

भरण-पोषण सहायता जारी रखने पर बनी सहमति
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम में यह भी विचार किया गया था कि जिन आश्रित परिवारों ने अनुकंपा नौकरी नहीं ली है, उन्हें मिलने वाली पांच वर्षों की भरण-पोषण सहायता बंद कर दी जाए। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हुए।इसके चलते फिलहाल आश्रित परिवारों को मिलने वाली यह आर्थिक सहायता व्यवस्था पहले की तरह जारी रहने की संभावना है।
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दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के परिवारों को मिलेगी पुरानी राशि
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम के तहत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को दो लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है। कर्मचारियों की ओर से इस राशि को बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने अभी इसमें बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है।यह व्यवस्था वर्ष 2014 से लागू है और वर्तमान में इसे यथावत रखा जाएगा।

परिवार छोड़ने पर जा सकती है नौकरी
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम में एक सख्त प्रावधान जोड़ा जा सकता है। यदि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाला बेटा या अन्य सदस्य नौकरी मिलने के बाद परिवार से अलग हो जाता है या उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो उसकी नियुक्ति समाप्त की जा सकती है।इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुकंपा नियुक्ति का वास्तविक लाभ जरूरतमंद परिवार तक पहुंचे।

लापता कर्मचारियों से जुड़े नियमों में होगा बदलाव
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम के तहत पहले यदि कोई शासकीय कर्मचारी सात साल तक लापता रहता था तो उसे मृत मानकर उसके परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दे दी जाती थी।प्रस्तावित बदलाव के अनुसार यदि सात साल बाद कर्मचारी के जीवित होने की जानकारी सामने आती है तो उस आधार पर दी गई अनुकंपा नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है।

CPCT परीक्षा को लेकर भी सख्त होंगे नियम
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिए CPCT परीक्षा अनिवार्य बनी रहेगी। परीक्षा पास करने के लिए तीन से चार वर्षों का समय दिया जाएगा।यदि निर्धारित अवधि में कर्मचारी CPCT पास नहीं करता है, तो उसकी नियुक्ति समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होंगे नए नियम
एमपी अनुकंपा नियुक्ति नियम से जुड़े सभी प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट की सहमति मिलने के बाद नए नियम लागू किए जा सकते हैं।इन बदलावों से एक तरफ जरूरतमंद परिवारों को अधिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

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