Supreme Court Verdict on Hate Speech: हेट स्पीच मामले में अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को SC से बड़ी राहत; वृंदा करात की रिव्यू पिटीशन खारिज

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Supreme Court Verdict on Hate Speech: नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने कथित हेट स्पीच मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर और पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा को मिली राहत को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने माकपा (CPM) नेता वृंदा करात द्वारा 29 अप्रैल के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को पूरी तरह से खारिज कर दिया। याचिका में दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह एफआईआर की मांग को लेकर इस मामले की दोबारा सुनवाई करने के पक्ष में नहीं है।

“कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता” — SC बेंच का सख्त रुख

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पूर्व के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री और पुलिस द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया है।

अदालत ने टिप्पणी की कि “देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को” जैसे नारे या बयानबाजी से प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) नहीं बनता है। पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि हालांकि ये भाषण राजनीतिक रूप से विवादास्पद थे, लेकिन इन्हें किसी खास समुदाय (Specific Community) को लक्षित करके दिया गया बयान नहीं माना जा सकता।

क्या था 2020 के भाषणों का विवाद?

यह पूरा मामला जनवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान दिए गए बयानों से संबंधित है:

  • अनुराग ठाकुर का बयान: चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में कथित तौर पर ‘देश के गद्दारों को…’ वाले विवादित नारे लगवाए गए थे।

  • प्रवेश वर्मा की टिप्पणी: चुनावी सभाओं में शाहीन बाग के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में बयान दिया गया था।

इन बयानों के विरोध में सीपीएम नेता वृंदा करात और अन्य ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर दोनों नेताओं पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

निचली अदालत से लेकर शीर्ष अदालत तक कानूनी लड़ाई

याचिकाकर्ताओं की मांग को पहले निचली अदालत और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। शीर्ष अदालत ने भी पूर्व में दोनों नेताओं को राहत देते हुए कहा था कि कानून में इस तरह की शिकायतों से निपटने के लिए पहले से पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था मौजूद है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वृंदा करात की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद, पिछले चार सालों से चले आ रहे इस हाई-प्रोफाइल कानूनी विवाद पर अब पूर्ण विराम लग गया है।

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