Inter-State Gang Busted in Raipur: राजस्थान से सीखी ठगी, देश भर में फैलाया जाल; चाची-भतीजे समेत 3 आरोपी रायपुर से गिरफ्तार

VIKASH KHALKHO

Inter-State Gang Busted in Raipur: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने रिश्तों की आड़ में चलाए जा रहे एक हाई-प्रोफाइल और संगठित अपराध नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है। राजस्थान के जयपुर से पीतल को सोना बताकर बेचने का तरीका सीखने के बाद एक चाची और उसके भतीजे ने अंतरराज्यीय ठग गिरोह खड़ा कर लिया।

इस गिरोह ने रायपुर के तीन बड़े कारोबारियों को खुदाई में मिले ‘पुराने सोने के जेवर’ का झांसा देकर 22.50 लाख रुपये का चूना लगा दिया। रायपुर पुलिस की गहन जांच में आरोपियों के बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में फैले जाल का पर्दाफाश हुआ है।

राजस्थान से मिला ‘ठगी का आइडिया’ और तरीका

पुलिस पूछताछ में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड शंभू राय है। वह शुरुआत में विभिन्न राज्यों में घूम-घूमकर रत्न और राशि के पत्थर बेचने का काम करता था। इसी दौरान जयपुर (राजस्थान) में उसकी मुलाकात एक स्टोन कारोबारी से हुई, जिसने उसे पीतल की चेन दिखाकर असली सोना बताकर ठगने का पूरा ‘मास्टरप्लान’ और रणनीति समझाई।

जयपुर के कारोबारी ने न केवल शंभू को पीतल के नकली जेवर उपलब्ध कराए, बल्कि लोगों का विश्वास जीतने के अचूक पैंतरे भी सिखाए।

कैसे काम करता था चाची-भतीजे का यह गिरोह? (Modus Operandi)

राजस्थान से ठगी के गुर सीखने के बाद शंभू राय ने अपनी चाची गीता गुजराती को इस काले धंधे में शामिल कर लिया।

  1. शिकार की पहचान: गिरोह सबसे पहले ऐसे लोगों या कारोबारियों को निशाना बनाता था जो जल्दी मुनाफा कमाने की होड़ में आसानी से लालच में आ जाते थे।

  2. मजदूर का भेष: आरोपी खुद को मजदूर या खुदाई करने वाला बताते थे और दावा करते थे कि उन्हें काम के दौरान पुराने सोने के कीमती आभूषण मिले हैं।

  3. नमूने (Sample) का खेल: जब पीड़ित जेवरों की शुद्धता की जांच कराने की बात कहता, तो आरोपी उसे जांच के लिए असली सोने का एक छोटा टुकड़ा थमा देते थे।

  4. ठगी का अंजाम: लैब या सर्राफा दुकान से सैंपल असली साबित होने पर पीड़ित को पूरा भरोसा हो जाता था। इसके बाद गिरोह लाखों रुपये नगद लेकर पीड़ित को पीतल से बने नकली जेवर थमाकर फरार हो जाता था।

बिहार से शुरू हुआ सिलसिला, पड़ोसी महिला भी बनी साथी

वर्ष 2023 में चाची-भतीजे की जोड़ी ने बिहार के सासाराम में पहली वारदात को अंजाम देकर एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये ठगे थे। इसके बाद झारखंड के देवघर में 1.25 लाख रुपये की ठगी की गई।

लगातार हो रही मोटी कमाई, महंगे कपड़ों, विदेश जैसी यात्राओं और आलीशान रहन-सहन को देखकर उनकी पड़ोसी शांति गुजराती भी इस लालच में गिरोह का हिस्सा बन गई। इसके बाद तीनों ने मिलकर देश के अलग-अलग राज्यों में अपना नेटवर्क स्थापित कर लिया।

रायपुर में मई 2026 में दिया वारदात को अंजाम

जांच के अनुसार, यह गिरोह मई 2026 में रायपुर पहुंचा था। यहां उन्होंने तीन अलग-अलग कारोबारियों को अपनी बातों में फंसाया और असली सोने का सैंपल देकर उनका विश्वास जीता। जांच सही पाए जाने पर कारोबारियों ने कुल 22.50 लाख रुपये देकर कथित सोने के जेवर खरीद लिए।

जब बाद में जेवरों की विस्तृत जांच कराई गई, तो वे पीतल के निकले। पीड़ितों की शिकायत पर रायपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर आधुनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से इस अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्यों को दबोच लिया। पुलिस अब आरोपियों से अन्य राज्यों में की गई ठगी के संबंध में पूछताछ कर रही है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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