Monday, September 14, 2026
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MP Agriculture Cabinet Nagalwadi : नागलवाड़ी में सजेगी मोहन सरकार की ‘कृषि कैबिनेट’; आदिवासियों को साधने की कवायद या चुनावी स्टंट? छिड़ा सियासी घमासान

MP Agriculture Cabinet Nagalwadi : बड़वानी (01 मार्च 2026): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी कैबिनेट के साथ सोमवार को बड़वानी जिले के राजपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नागलवाड़ी पहुँच रहे हैं। यहाँ प्रदेश की पहली ‘कृषि कैबिनेट’ बैठक आयोजित की जा रही है, जो निमाड़ और मालवा के 7 आदिवासी बहुल जिलों (खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर) पर केंद्रित होगी। प्रशासन ने भिलट देव की पावन धरा पर तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन इस बैठक के साथ ही प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

नीति और नीयत पर उठे सवाल राजपुर विधायक और पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने सरकार की इस पहल पर कड़ा प्रहार किया है। बच्चन ने कहा कि कैबिनेट कहीं भी हो, वल्लभ भवन में या नागलवाड़ी में, उससे फर्क नहीं पड़ता; फर्क सरकार की नीयत से पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने नागलवाड़ी को 1900 करोड़ रुपये की सौगात दी थी। बच्चन ने आरोप लगाया कि बजट सत्र को समय से पहले समाप्त कर सरकार आदिवासियों के मुद्दों और कांग्रेस के 4400 सवालों से बचना चाहती है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर 1500 एकड़ आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों के नाम कैसे हुई?

भाजपा का पलटवार: कांग्रेस को लग रहा है डर दूसरी ओर, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय यादव ने इस आयोजन को जिले के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ घोषित किया है और ग्रामीण अंचल में कैबिनेट का होना किसानों के प्रति सरकार के समर्पण को दर्शाता है। यादव ने बाला बच्चन पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को भाजपा की जमीनी पकड़ से डर लग रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि राज्यपाल और पूरी कैबिनेट आदिवासियों के बीच आ रही है, तो कांग्रेस को इसमें क्या आपत्ति है?

2028 की बिसात और 28 सीटें राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक के पीछे असली खेल 2028 के विधानसभा चुनाव का है। जिन 7 जिलों पर फोकस किया जा रहा है, वहाँ की 28 विधानसभा सीटों में से फिलहाल 14 पर भाजपा और 14 पर कांग्रेस का कब्जा है। आदिवासी वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए सरकार यहाँ कृषि विकास और सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े बड़े फैसलों की घोषणा कर सकती है। भिलट बाबा के स्थान पर होने वाली यह बैठक आस्था और राजनीति का एक दिलचस्प संगम बनती नजर आ रही है।

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