इंदौर : इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला पानी पीने से हो रही मौतों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। बुधवार, 7 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन ने राहत सहायता सूची में दो और पीड़ितों—रामकली जगदीश और श्रवण नत्यु खुपराव—के नाम शामिल किए हैं।
सरकारी रिपोर्ट बनाम जमीनी हकीकत
इस पूरे मामले में आंकड़ों को लेकर गंभीर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन अब तक 18 परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दे चुका है। दो नए नाम जुड़ने के बाद यह संख्या 20 तक पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: आंकड़ों से ऊपर इंसानियत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ शब्दों में कहा है कि सरकार अब केवल तकनीकी आंकड़ों के सहारे नहीं चलेगी। उन्होंने कहा,“हर एक जान का जाना सरकार के लिए पीड़ादायक है। नियमों से ऊपर उठकर हर पीड़ित परिवार को राहत दी जाएगी।”यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रशासन और सरकार के दावों के बीच अंतर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन ने बदला रुख, शुरू हुआ क्रॉस वेरिफिकेशन
अब प्रशासन पुराने आंकड़ों पर टिके रहने के बजाय क्रॉस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अपना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे मौतों की पुष्टि हो रही है, वैसे-वैसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा सूची में जोड़ा जा रहा है।
इलाके में दहशत, भरोसे की तलाश
मौतों का आंकड़ा बढ़ने से भागीरथपुरा क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग साफ पानी, स्वास्थ्य जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती भरोसा बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की है।









