M.P News : बुरहानपुर में कमर्शियल गैस की किल्लत से होटल-ढाबे परेशान, लकड़ी और कोयले की भट्टी पर बन रहा खाना

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से होटल, ढाबा और मिठाई व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई प्रतिष्ठानों में गैस की जगह लकड़ी, कोयला और डीजल की भट्टियों का इस्तेमाल कर काम चलाया जा रहा है।गैस की कमी के कारण कई छोटे होटल और चौपाटी संचालक अपने प्रतिष्ठान बंद करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

गैस नहीं मिलने से बढ़ी व्यापारियों की परेशानी

शहर के होटल संचालक दिनेश चौधरी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम हो गई है। इसका असर अब स्थानीय बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।

उन्होंने बताया कि गैस समय पर नहीं मिलने के कारण मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टी पर भोजन तैयार करना पड़ रहा है। इसके लिए अलग से भट्टियां बनवानी पड़ी हैं, जिससे खर्च भी बढ़ गया है और ग्राहकों को भोजन के लिए इंतजार करना पड़ता है।

मिठाई दुकानों में भी उत्पादन प्रभावित

बुरहानपुर के प्रसिद्ध मिलन मिठाई के मैनेजर बन्नतवाला ने बताया कि गैस की कमी के कारण मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।मजबूरी में फैक्ट्री में कोयले की भट्टी जलाकर काम किया जा रहा है, जिससे उत्पादन की रफ्तार धीमी हो गई है।

पुराने तरीके से भट्टी पर काम करने की मजबूरी

वहीं कुंदन स्वीट्स के मैनेजर भाऊलाल महाजन का कहना है कि गैस की कमी के कारण अब उन्हें पुराने जमाने की तरह लकड़ी और कोयले की पारंपरिक भट्टियों पर काम करना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि नए कर्मचारी गैस पर काम करने के आदी हैं, इसलिए उन्हें अब पारंपरिक भट्टियों पर काम करना सीखना पड़ रहा है।

शादी सीजन और रमजान में बढ़ी चिंता

व्यापारियों का कहना है कि इस समय शादी-विवाह का सीजन शुरू हो चुका है और रमजान का महीना भी चल रहा है, जिसके कारण बाजार में मांग बढ़ गई है।ऐसे समय में गैस की किल्लत से होटल, ढाबा और मिठाई कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारियों की प्रशासन से मांग

व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द कमर्शियल गैस की आपूर्ति को सामान्य किया जाए, ताकि कारोबार प्रभावित न हो।यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में कई छोटे होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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