छत्तीसगढ़ में बन रहा सीमेंट, फिर भी M.P से महंगा क्यों? नॉन-ट्रेड में बड़ा अंतर… क्या कंपनियों का चल रहा ‘रेट गेम’ 

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MP में सस्ता, CG में महंगा… आखिर कौन बढ़ा रहा सीमेंट के रेट?

MP CG Cement Price Comparison के बीच अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का सीमेंट बाजार नई बहस के केंद्र में आ गया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर सीमेंट उत्पादन हो रहा है, वहीं आम ग्राहकों और ठेकेदारों को मध्यप्रदेश के मुकाबले ज्यादा कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है?

MP CG Cement Price Comparison ने बिल्डर्स, ठेकेदारों और रियल एस्टेट सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है। सड़क, पुल, सरकारी भवन और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की लागत लगातार ऊपर जा रही है।

छत्तीसगढ़ बना उत्पादन हब, फिर भी महंगी सीमेंट बोरी

Chhattisgarh Cement Price को लेकर स्थानीय बाजार में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। रायपुर, भिलाई, दुर्ग और बलौदाबाजार जैसे क्षेत्रों में कई बड़े सीमेंट प्लांट मौजूद हैं।छत्तीसगढ़ में चूना पत्थर और कोयले जैसे कच्चे संसाधन भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यहां नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।स्थानीय ठेकेदारों का दावा है कि जो नॉन-ट्रेड सीमेंट कुछ समय पहले 300 से 310 रुपये प्रति बोरी मिल रहा था, वह अब 340 रुपये तक पहुंच चुका है।

मध्यप्रदेश में क्यों मिल रही तुलनात्मक राहत?

MP Cement Rates पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश के कई जिलों में कीमतें छत्तीसगढ़ से कम दिखाई देती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार सतना, मैहर और कटनी जैसे बड़े उत्पादन केंद्रों के कारण मध्यप्रदेश में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा ज्यादा है। यही वजह है कि कई ब्रांड ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपेक्षाकृत कम रेट पर सीमेंट बेच रहे हैं।हालांकि दूरस्थ जिलों में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से कीमतों में अंतर जरूर आता है, लेकिन फिर भी कई मामलों में MP बाजार छत्तीसगढ़ से सस्ता पड़ रहा है।

MP-CG सीमेंट रेट तुलना ने बढ़ाई बहस

मध्यप्रदेश बनाम छत्तीसगढ़ सीमेंट रेट तुलना (50 किलो बोरी)

सीमेंट का प्रकार मध्यप्रदेश रेट छत्तीसगढ़ रेट
PPC लोकल सीमेंट ₹260 – ₹310 ₹230 – ₹290
PPC प्रीमियम ब्रांड ₹330 – ₹360 ₹280 – ₹320
OPC 43 ग्रेड ₹310 – ₹350 ₹275 – ₹330
OPC 53 ग्रेड ₹350 – ₹380 ₹335 – ₹350
नॉन-ट्रेड सीमेंट ₹290 – ₹320 ₹310 – ₹340

नॉन-ट्रेड सीमेंट में सबसे ज्यादा अंतर

Non Trade Cement Price इस समय सबसे बड़ी चिंता बन चुका है।सरकारी निर्माण कार्यों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मुख्य रूप से नॉन-ट्रेड सीमेंट का उपयोग होता है। छत्तीसगढ़ में इसके रेट लगातार बढ़ने से सरकारी टेंडर और प्रोजेक्ट लागत प्रभावित हो रही है।ठेकेदारों का आरोप है कि कई बार स्थानीय बाजार में वही सीमेंट महंगा मिलता है, जो दूसरे राज्यों में कम कीमत पर सप्लाई किया जा रहा है।

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क्या कंपनियों की मिलीभगत बढ़ा रही कीमतें?

Cement Companies पर एक बार फिर कार्टेलाइजेशन के आरोप तेज हो गए हैं।स्थानीय व्यापारी संगठनों और बिल्डर्स का कहना है कि बड़ी कंपनियां सप्लाई नियंत्रित कर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करती हैं, जिससे कीमतें ऊपर बनी रहती हैं।रायपुर और दुर्ग के कई कारोबारियों का दावा है कि सीमित प्रतिस्पर्धा के कारण ग्राहकों को महंगी सीमेंट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

लॉजिस्टिक्स और बाजार नियंत्रण भी बड़ा कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक MP CG Cement Price Comparison में अंतर की बड़ी वजह लॉजिस्टिक्स और बाजार संरचना भी है।मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में सीमेंट कंपनियां सक्रिय हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। वहीं छत्तीसगढ़ में सीमित बड़े ब्रांड्स का दबदबा अधिक बताया जाता है।इसके अलावा इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट, डीलर नेटवर्क और सप्लाई वितरण की रणनीति भी कीमतों को प्रभावित कर रही है।

रियल एस्टेट और आम लोगों पर सीधा असर

Cement Price Hike का असर अब सीधे आम लोगों तक पहुंचने लगा है।घर बनाने की लागत लगातार बढ़ रही है। छोटे बिल्डर्स और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सीमेंट की कीमतों में 20 से 30 रुपये प्रति बोरी तक और बढ़ोतरी हो सकती है।अगर बाजार में नियंत्रण नहीं हुआ तो रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और आम लोगों के लिए मकान बनाना और मुश्किल हो जाएगा।

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