Bhilai University Registrar Arrest: भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी का मामला छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। भिलाई स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर आर्थिक और मानसिक शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया, हालांकि बाद में उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसे लगातार धमकाकर उसकी मासिक सैलरी का बड़ा हिस्सा हर महीने रजिस्ट्रार के बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर कराया जाता था। आरोप है कि ऐसा लंबे समय तक होता रहा।
जांच में सामने आईं अहम बातें
भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी मामले की जांच के दौरान पुलिस को प्रारंभिक स्तर पर महिला के आरोपों से जुड़े तथ्य मिले। जांच के आधार पर रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है और सभी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
Read more: CG Rain Alert: छत्तीसगढ़ में अगले 3 दिन बारिश का अलर्ट! IMD ने जारी की चेतावनी
घर का काम कराने का भी आरोप
भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी प्रकरण में यह आरोप भी लगाया गया है कि महिला कर्मचारी से विश्वविद्यालय के कार्यों के अलावा रजिस्ट्रार अपने घर का खाना भी बनवाते थे। इन आरोपों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
पुलिस ने की गिरफ्तारी, फिर मिली जमानत
भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी मामले में मोहन नगर थाना पुलिस ने सोमवार को आरोपी रजिस्ट्रार को गिरफ्तार किया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष आना बाकी
भिलाई विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार गिरफ्तारी मामले में फिलहाल जांच जारी है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां महिला कर्मचारी के आरोपों, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला अदालत और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।




