मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है, जिसके कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दिसंबर में संभावित ब्याज दर कटौती के संकेतों के बावजूद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारत में निवेश घटाया है। इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के रूप में देखने को मिल रहा है। विदेशी निवेश कम होने से घरेलू बाजार की सेंटिमेंट पर भी असर पड़ा है।
दूसरे दिन भी रुपये में तेजी, डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ
विदेशी बिकवाली के दबाव के बावजूद भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे की मजबूती के साथ 89.05 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को रुपये में 50 पैसे की तेजी देखने को मिली थी, जबकि शुक्रवार को यह तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट के साथ 89.66 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था।
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इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 89.02 पर खुला और कारोबार के शुरुआती घंटों में डॉलर के मुकाबले मजबूती बनाए रखी। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स की मजबूती और विदेशी पूंजी निकासी रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बना बाजार के लिए राहत
रुपये में मजबूती का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट है। ब्रेंट क्रूड 0.33% गिरकर 63.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए राहत की खबर है। इससे आयात बिल कम होने और चालू खाते पर दबाव घटने की उम्मीद है।वहीं डॉलर इंडेक्स 0.06% बढ़कर 100.13 पर पहुंचा है, जिससे वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूत स्थिति बनी हुई है।
शेयर बाजार पर दबाव, निवेशकों की चिंता बढ़ी
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भी कमजोरी रही। सेंसेक्स 46.99 अंक गिरकर 84,853.72, जबकि निफ्टी 10.35 अंक गिरकर 25,949.15 पर आ गया। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 4,171.75 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे मार्केट में दबाव और बढ़ा।









