Monday, August 31, 2026
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Durg News : जमीन गाइडलाइन एवं रजिस्ट्री शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में रियल-एस्टेट कारोबारी आंदोलन, पुलिस लाठीचार्ज, विधायक भूख हड़ताल पर

Durg News
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Durg News : दुर्ग : छत्तीसगढ़ में जमीन की गाइडलाइन दरों और रजिस्ट्री शुल्क में रिकार्ड वृद्धि के बाद रियल-एस्टेट कारोबारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। नई दरों को लेकर बड़ी संख्या में व्यापारी, दलाल और रियल-एस्टेट एजेंट विरोध के स्वर उठा रहे हैं।

Durg News : केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की अनुशंसा पर लागू नई दरों के तहत कई इलाकों में जमीन व भवन रजिस्ट्री की कीमतें 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं। व्यापारियों और रियल-एस्टेट कारोबारियों का आरोप है कि इस अचानक बढ़ोतरी से रियल-एस्टेट कारोबार पटरी से उतर जाएगा। छोटे भूखंड धारकों और मध्यम-वर्गीय खरीदारों के लिए मकान या ज़मीन लेना असंभव हो जाएगा।

Durg News : दुर्ग में 1 दिसंबर को आयोजित शांतिपूर्ण धरने के दौरान जब कारोबारियों ने कलेक्ट्रेट घेरे जाने की कोशिश की — काले झंडे व गुब्बारे के साथ — तो पुलिस ने बल प्रयोग कर लाठीचार्ज किया। कई लोग घायल हुए और कुछ को गिरफ्तार भी किया गया।

Durg News : इस लाठीचार्ज के विरोध में भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव ने आज गांधी पुतला के पास एक दिवसीय भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जमीन की नई गाइडलाइन दरों में हुई “बेतहाशा वृद्धि” गरीब और मध्यम वर्ग पर भारी आर्थिक बोझ लाएगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि यह फैसला वापस लिया जाए, अन्यथा व्यापारियों व आम लोगों की उठ रही शिकायतों को अनदेखा करना “न्याय के साथ धोखा” होगा।

Durg News : कारोबारियों के प्रमुख आरोप

Durg News : नई दरें अप्रत्याशित रूप से कई गुना बढ़ाई गई हैं, जिससे छोटे भूखंड विक्रेताओं व खरीदारों को भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। रजिस्ट्री शुल्क भी जमीन की कीमत के समान — या उससे अधिक — हो गया है, जिससे आम जनता के लिए मकान या जमीन खरीदना लगभग असंभव हो गया है। कई छोटे निवेशक, किसान और मध्यम वर्गीय परिवार इस नीति के चलते प्रभावित हुए हैं।

Durg News : विधायक देवेंद्र यादव की मांग:

Durg News : सरकार द्वारा बढ़ाई गई गाइडलाइन दर एवं रजिस्ट्री शुल्क तत्काल वापस लिया जाए। भूखंडों की रजिस्ट्री आसान और सस्ती होनी चाहिए, ताकि आम जनता व छोटे निवेशक जमीन खरीद सकें।यदि इन मांगों पर न्याय नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की जमीन-नीति, सरकारी दरों और रियल-एस्टेट के कारोबार की संवेदनशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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