Saturday, September 5, 2026
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Gare Palma Scam: छत्तीसगढ़ कोयला खदान आवंटन धांधली: दिल्ली की विशेष अदालत ने लिया संज्ञान, कानूनी कार्रवाई तेज

Gare Palma Scam: नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के चर्चित गारे पाल्मा 4/1 कोयला खदान आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं के मामले में जाने-माने उद्योगपति और सांसद नवीन जिंदल की मुश्किलें अब काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर किए गए पूरक आरोपपत्र पर औपचारिक रूप से संज्ञान ले लिया है। इसके साथ ही, अदालत ने नवीन जिंदल और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख समेत कई अन्य रसूखदार आरोपियों को समन जारी कर तलब किया है। इस वीआईपी मामले में कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी कानूनी सरगर्मियां देश में एक बार फिर बेहद तेज हो गई हैं।

कोयला आवंटन मामलों की सबसे भारी-भरकम चार्जशीट

विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की है। उन्होंने कहा कि यह नया आरोपपत्र सीबीआई द्वारा इस पूरे मामले में पहली प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज किए जाने के करीब एक दशक से भी अधिक समय के बाद अदालत में दाखिल किया गया है। विशेष अदालत ने प्रस्तुत किए गए इस विस्तृत दस्तावेज़ को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटालों के इतिहास में अब तक के सबसे ज्यादा विस्तृत, गहन और भारी-भरकम आरोपपत्रों में से एक माना है।

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आगामी 17 जुलाई को अदालत में पेश होने के आदेश

विशेष अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ समन जारी कर दिया है। कोर्ट ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल), इसके प्रबंध निदेशक नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एस.के. अग्रवाल तथा नलवा संस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड को सीधे तौर पर समन भेजा है। न्यायधीश ने इन सभी नामजद आरोपियों को आगामी 17 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

नियमों और तय प्रक्रियाओं को ताक पर रखने का आरोप

सीबीआई की यह पूरी जांच मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित गारे पाल्मा 4/1 कोयला ब्लॉक के आवंटन में हुई गंभीर धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई है। जांच एजेंसी का सीधा आरोप है कि इस विशेष आवंटन प्रक्रिया के दौरान तय सरकारी नियमों, पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का खुलेआम उल्लंघन किया गया था। इस मामले की गहन जांच राष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से चल रही थी और अब जाकर अदालत द्वारा इस पर कड़ा संज्ञान लिया गया है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है कानूनी आंच

यह पूरा मामला देश के सबसे चर्चित और बड़े कोयला ब्लॉक आवंटन घोटालों की सूची में शुमार माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि सीबीआई द्वारा पुख्ता सबूत पेश किए जाने और अदालत द्वारा इस पर संज्ञान लिए जाने के बाद आरोपियों के लिए राहत की राह बेहद मुश्किल हो गई है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर न्यायिक कार्यवाही और तेज होने की पूरी संभावना है, जिससे कई बड़े उद्योगपतियों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

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