Surajpur Monsoon Mishap: विश्रामपुर, सूरजपुर। मध्य भारत और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में जारी मूसलाधार बारिश अब आम जनजीवन पर भारी पड़ने लगी है। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र में देर रात एक बड़ी दुर्घटना उस वक्त टल गई, जब भारतीय खाद्य निगम (FCI) गोदाम की बाउंड्रीवॉल ताश के पत्तों की तरह ढह गई। दीवार के मलबे की चपेट में आने से उससे सटे करीब 7 रिहायशी मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
मंगलवार (21 जुलाई 2026) को सामने आई इस घटना में गनीमत यह रही कि मलबे की चपेट में कोई इंसान नहीं आया और समय रहते लोग सुरक्षित बाहर निकल आए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
बिना कॉलम खड़ी कर दी गई थी 8 फीट ऊंची दीवार
घटना के बाद से ही विश्रामपुर के स्थानीय निवासियों और प्रभावित परिवारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि FCI गोदाम की यह 7 से 8 फीट ऊंची बाउंड्रीवॉल वर्षों पुरानी और जर्जर स्थिति में थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी लंबी और ऊंची दीवार का निर्माण बिना किसी आरसीसी कॉलम (Structural Column) के किया गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से इस खतरनाक दीवार की शिकायत की थी, लेकिन सुरक्षा इंतजाम करने के बजाय विभाग ने केवल बाहर से रंग-रोगन (पेंट) करके उसकी कमियों को ढकने का काम किया।
SDM शिवानी जायसवाल ने संभाला मोर्चा, दिए जांच के आदेश
घटना की सूचना मिलते ही सूरजपुर एसडीएम (SDM) शिवानी जायसवाल प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया।
SDM शिवानी जायसवाल का आधिकारिक बयान:
“दीवार गिरने की वजह से 7 मकानों को क्षति पहुंची है। राजस्व टीम द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को शासन के नियमानुसार तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही गोदाम की बची हुई बाउंड्रीवॉल की भी सुरक्षा जांच कराई जा रही है। FCI के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र जारी कर इस पूरे निर्माण और लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।”
FCI प्रबंधक के गैर-जिम्मेदाराना बयान से भड़के लोग
एक तरफ जहां स्थानीय जनता और प्रशासन इस घटना को निर्माण की तकनीकी ढिलाई मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ FCI गोदाम के प्रबंधक का बयान विवादों के घेरे में आ गया है। प्रबंधक ने मीडिया के सामने यह स्वीकार तो किया कि बाउंड्रीवॉल बिना कॉलम के बनाई गई थी और पुरानी थी, लेकिन हादसों का सारा ठीकरा “प्राकृतिक आपदा” (Natural Calamity) पर फोड़ दिया।
प्रबंधक ने तर्क दिया कि लगातार बारिश के कारण यह हुआ है और यदि आगे भी दीवार का कोई हिस्सा गिरता है, तो उसे प्राकृतिक आपदा ही माना जाएगा। प्रबंधक के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है, वे ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने व पूर्ण मुआवजे की मांग पर अड़े हैं।







