CG Monsoon Update: रायपुर। भीषण गर्मी, तपती धूप और रिकॉर्ड तोड़ पारे से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए मौसम विभाग से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में इस साल मानसून समय पर दस्तक देने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, आगामी 12 से 13 जून को बस्तर संभाग के रास्ते छत्तीसगढ़ में आधिकारिक रूप से मानसून की एंट्री होने की प्रबल संभावना बन गई है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 15 जून 2026 तक मानसूनी हवाएं रफ्तार पकड़ते हुए पूरे छत्तीसगढ़ को अपनी आगोश में ले लेंगी, जिससे जून के मध्य तक प्रदेश के सभी जिलों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य तेलंगाना के ऊपर एक बेहद मजबूत और सक्रिय वेदर सिस्टम (मौसम प्रणाली) का निर्माण हो रहा है। इस त्रिकोणीय सिस्टम के प्रभाव से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली ठंडी व नमी युक्त हवाओं को भारी बल मिल रहा है। इस सिस्टम का सबसे व्यापक और प्रारंभिक असर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में देखने को मिलेगा। बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में मानसून की एंट्री के साथ ही भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं।
यदि राजधानी रायपुर और उत्तरी छत्तीसगढ़ की बात करें, तो मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार रायपुर में सामान्यतः 16 जून तक मानसून की एंट्री होती है। लेकिन इस साल बन रहे मजबूत सिस्टम को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि रायपुर में भी समय पर या तय तिथि से एक-दो दिन पहले ही मानसूनी बौछारें पड़नी शुरू हो जाएंगी। रायपुर और मैदानी इलाकों को तरबतर करने के बाद मानसूनी हवाएं आगे की ओर बढ़ेंगी। रायपुर के बाद अंत में सरगुजा संभाग में मानसून प्रवेश करता है, जहां जून के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में व्यापक वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के आगमन की इन अनुकूल परिस्थितियों के चलते आगामी दो से तीन दिनों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां (जैसे तेज आंधी चलना, गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ना) काफी तेज हो जाएंगी। इससे पिछले कई हफ्तों से चल रही जानलेवा लू और उमस भरी गर्मी से आम जनमानस को बड़ी राहत मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों ने भी मानसून के इस सटीक शेड्यूल को देखते हुए प्रदेश के किसानों को खरीफ फसलों की बुआई और खेतों की तैयारी की रूपरेखा तैयार करने की सलाह दी है।









