Indore Theft Case: इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए चर्चित बड़वानी प्लाजा इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम चोरी कांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने नोएडा स्थित आयकर विभाग में कार्यरत टैक्स असिस्टेंट प्रतीक लिखार को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी करने के बाद ChatGPT की मदद से फर्जी बिल तैयार करता था और उन्हीं बिलों के जरिए चोरी के सामान को असली बताकर बाजार में बेच देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 21 लैपटॉप, 4 टैबलेट, 4 स्मार्टफोन और 2 स्मार्ट वॉच सहित लाखों रुपये का चोरी का सामान बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी नुकसान होने के बाद उसने चोरी का रास्ता अपनाया। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने इस तरह की कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।
20 जुलाई को हुई थी हाई-प्रोफाइल चोरी
Indore Theft Case: पुलिस अधिकारियों के अनुसार 20 जुलाई को इंदौर के बड़वानी प्लाजा स्थित एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में चोरी की वारदात हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए।सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसके ठिकाने तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
ऑनलाइन ट्रेडिंग में करोड़ों नहीं, लेकिन भारी नुकसान ने बदल दी जिंदगी
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगातार नुकसान झेल रहा था। इस कारण उस पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया। आर्थिक संकट से बाहर निकलने और कर्ज चुकाने के लिए उसने महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की चोरी करने की योजना बनाई।पुलिस का दावा है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से चोरी की वारदात को अंजाम दिया और उसके बाद चोरी का सामान बेचकर पैसे जुटाने की कोशिश की।
ChatGPT की मदद से तैयार करता था फर्जी बिल
Indore Theft Case: इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ChatGPT का इस्तेमाल कर नामी इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम के फर्जी खरीद बिल (Fake Invoices) तैयार करता था।
इन बिलों को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि देखने में वे बिल्कुल असली लगें। आरोपी जब चोरी का सामान बेचता था, तो खरीदारों को यही फर्जी बिल दिखाकर विश्वास दिलाता था कि सामान कानूनी रूप से खरीदा गया है।पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने फर्जी बिल बनाने के लिए किन-किन डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया और क्या इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
लाखों रुपये का चोरी का सामान बरामद
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है। जब्त किए गए सामान में शामिल हैं—
- 21 लैपटॉप
- 4 टैबलेट
- 4 स्मार्टफोन
- 2 स्मार्ट वॉच
पुलिस के अनुसार, बरामद सभी सामान की बाजार कीमत लाखों रुपये है। जब्त किए गए उपकरणों की पहचान और मालिकों का सत्यापन भी किया जा रहा है।
छह महीने पहले नोएडा से आया था इंदौर
Indore Theft Case: जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी करीब छह महीने पहले नोएडा से इंदौर आया था। वह शहर के एक हॉस्टल में रह रहा था और वहीं से अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था।पुलिस को संदेह है कि उसने इस दौरान इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में अन्य चोरी की वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है। इस पहलू पर भी जांच जारी है।
डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों की होगी जांच
Indore Theft Case: पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, लैपटॉप, ईमेल, बैंक खातों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी का सामान किन लोगों को बेचा गया और क्या इस पूरे मामले में कोई संगठित गिरोह सक्रिय था।
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







