रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आज ACB-EOW स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। रिटायर IAS निरंजन दास और कारोबारी यश पुरोहित की रिमांड 4 दिन के लिए बढ़ा दी गई है, जबकि कारोबारी नीतेश पुरोहित को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।
कैसे पहुंचता था घोटाले का पैसा?
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, घोटाले का पैसा अनवर ढेबर के पास जाता था। जनवरी 2019 से फरवरी 2020 तक यह रकम रायपुर के जेल रोड स्थित गिरीराज होटल (जो नीतेश और यश पुरोहित का है) में रखी जाती थी। यहीं से पैसा नेताओं, मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों और पार्टी फंड तक पहुंचाया जाता था।
इस पूरे नेटवर्क को अनवर का मैनेजर दीपेन् चावड़ा, भिलाई के लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू और चैतन्य बघेल मैनेज करते थे। आरोप है कि इस रकम का हिस्सा तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास तक भी पहुंचाया गया।
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क्या है ‘बी-पार्ट शराब घोटाला’?
वर्ष 2019 से 2023 के बीच 15 जिलों में आबकारी अधिकारियों ने बिना ड्यूटी चुकाए देसी शराब की अवैध बिक्री की। डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध स्टॉक के साथ समानांतर बेचा जाता था। इस अवैध शराब को ही “बी-पार्ट शराब” कहा गया।
इस नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, आबकारी विभाग के अधिकारी, मैन पावर एजेंसियां और सेल्समैन तक शामिल थे।
3200 करोड़ का घोटाला
अब तक की जांच में सामने आया है कि करीब 60.5 लाख पेटियां बी-पार्ट शराब की बेची गईं, जिसकी कीमत लगभग 2174 करोड़ रुपये है। नए अनुमानों के अनुसार घोटाले की राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
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कौन-कौन जेल में?
इस मामले में पहले ही पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, रिटायर्ड IAS अनिल टूटेजा, और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
ईओडब्ल्यू ने अब तक 70 लोगों को आरोपित बनाया है, जिनमें 8 डिस्टलरी संचालक भी शामिल हैं।













