नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में 2018 में हुई भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी कार्यकर्ता और तेलुगु कवि पी. वरवर राव की जमानत शर्तों में बदलाव की याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया।
वरवर राव ने यह याचिका इसलिए दायर की थी ताकि उन्हें ग्रेटर मुंबई क्षेत्र छोड़ने के लिए निचली अदालत से पूर्व अनुमति लेने की शर्त में ढील मिल सके। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला सरकार के स्वास्थ्य प्रबंध का विषय है।
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वरवर राव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने दलील दी कि कार्यकर्ता चार साल से जमानत पर हैं, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है और देखभाल करने वाला कोई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2022 को राव को चिकित्सा आधार पर जमानत दी थी। अदालत ने कहा कि यह जमानत केवल चिकित्सा कारणों के लिए दी गई है और अन्य मामलों में मिसाल नहीं बनेगी।
अदालत ने राव को निचली अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना मुंबई के अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाने का आदेश दिया और कहा कि उन्हें अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए या गवाहों से संपर्क नहीं करना चाहिए। राव को अपने मेडिकल उपचार के बारे में एनआईए को सूचित करना होगा।
वरवर राव को 28 अगस्त 2018 को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके अगले दिन कोरेगांव भीमा स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी। शुरुआत में उन्हें घर में नजरबंद रखा गया, बाद में पुलिस हिरासत और तलोजा जेल भेजा गया। 22 फरवरी 2021 को बंबई हाई कोर्ट ने उन्हें चिकित्सा आधार पर जमानत दी थी।
हालांकि, 13 अप्रैल 2022 को स्थायी जमानत की याचिका खारिज कर दी गई, लेकिन अस्थायी चिकित्सा जमानत तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई। राव वर्तमान में मुंबई में चिकित्सा जमानत पर बाहर हैं।









