Ken River Accident: छतरपुर में एलएनटी मशीनों से नदी का सीना चीर रहे माफिया, बेकसूर ग्रामीणों की जा रही जान

छतरपुर। जिले के चंदला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गोयरा थाना इलाके में अवैध रेत उत्खनन ने एक बार फिर एक मासूम की जान ले ली है। सरबई और गोयरा क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन के कारण एमपी-यूपी सीमा पर बहने वाली केन नदी में गुरुवार की दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ नदी में नहाने गया 18 वर्षीय युवक अनिल विश्वकर्मा अचानक पानी की जलधारा के बीच बने करीब 25 फीट गहरे गड्ढे में समा गया। गहराई अधिक होने के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाया और पानी में डूबने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

एक महीने के भीतर तीन घरों के चिराग बुझे

केन नदी में हुआ यह कोई पहला हादसा नहीं है। इसके विपरीत, पिछले केवल एक महीने के भीतर ही इस नदी में तीन युवकों की जान जा चुकी है। इससे पहले बीते 20 अप्रैल 2026 को लहूरेटा गांव के रहने वाले 16 वर्षीय अरशद की मौत भी इसी नदी के गहरे पानी में डूबने से हुई थी। इसके अलावा, अभी हाल ही में 20 मई बुधवार को नरैनी क्षेत्र के भवई गांव का 19 वर्षीय सद्दाम भी इसी तरह अवैध उत्खनन के कारण बने गड्ढे का शिकार हो गया था। आखिरकार, इन तीन मौतों का असली जिम्मेदार कौन है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

एलएनटी मशीनों से खोदे जा रहे मौत के कुएं

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सरबई और गोयरा क्षेत्र में रेत माफियाओं द्वारा प्रतिबंधित एलएनटी और लिफ्टर मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण केन नदी के बीचों-बीच 25 से 30 फुट गहरे जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं, जो अब पूरी तरह मौत का कुआं साबित हो रहे हैं। जबकि, शासन की तरफ से नदी की जलधारा के बीच में किसी भी प्रकार के उत्खनन की कोई अनुमति प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद, रेत माफिया दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक नदी का सीना चीर रहे हैं।

प्रशासन की चुप्पी और माफियाओं के बुलंद हौसले

क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत से ही केन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नष्ट किया जा रहा है। रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे स्थानीय लोगों के रोजगार को तो खत्म कर ही रहे हैं, साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस अवैध धंधे में कई बड़ी रसूखदार कंपनियां लगी हुई हैं, जिन पर कार्रवाई करने से स्थानीय अफसर भी कतराते हैं। परिणामस्वरूप, अब ग्रामीणों का नदी में नहाना और कपड़े धोना भी पूरी तरह असुरक्षित हो गया है।

नियमों की धज्जियां और प्राकृतिक संतुलन को खतरा

अवैध उत्खनन करने वाले इन माफियाओं के लिए क्षेत्र में कोई भी नियम या कानून लागू नहीं होता है। रेत निकालने के बाद ये लोग गहरे गड्ढों को वैसे ही खुला छोड़ देते हैं, जिसके कारण मानसून की दस्तक से पहले ही ये हादसे शुरू हो गए हैं। इसके अलावा, अत्यधिक अवैध उत्खनन से नदी के जलीय जीव-जंतुओं और सूक्ष्म जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। अंततः, गोयरा थाना पुलिस ने मृतक अनिल के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

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