Karur Stampede Case SC Hearing: गवाहों को धमकाने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा अंतरिम आवेदन पर विचार

Karur Stampede Case SC Hearing: नई दिल्ली: तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) आगामी मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को उस महत्वपूर्ण अर्जी पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है, जिसमें पिछले साल हुए इस दर्दनाक हादसे के गवाहों को सत्तासीन मंत्रियों और रसूखदार आरोपियों द्वारा सक्रिय रूप से प्रभावित करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इस पर त्वरित सुनवाई का फैसला किया है।

डीएमके नेता ने मंत्रियों पर लगाए गंभीर आरोप

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के संगठन सचिव आर. एस. भारती की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की आंशिक कार्य दिवस (पार्शियल वर्किंग डे) पीठ के समक्ष मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि इस मामले की तुरंत जांच की आवश्यकता है। अधिवक्ता अहमदी ने अदालत को याद दिलाया कि इस वीभत्स भगदड़ में 41 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने ही मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया था।

अर्जी में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान सरकार में शामिल कुछ रसूखदार आरोपी और मंत्री अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर इस केस से जुड़े गवाहों को सक्रिय रूप से प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विजय और आधव अर्जुन को रोकने की अपील

डीएमके नेता आर. एस. भारती ने इस मामले में खुद को एक पक्ष-प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन (इंटरलोक्यूटरी अर्जी) दायर किया है। अपनी याचिका में उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य सह-आरोपियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि इन सभी आरोपियों को सीबीआई जांच पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने, राजनीतिक विरोधियों को धमकाने या जांच के दौरान पीड़ितों के परिवारों से सीधे संवाद करने से रोका जाए, ताकि शीर्ष अदालत द्वारा निर्देशित स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की ईमानदारी बनी रहे।

यह पूरी त्रासदी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पार्टी द्वारा आयोजित एक विशाल राजनीतिक रैली के दौरान हुई थी, जिसमें कुप्रबंधन के चलते मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में 13 अक्टूबर 2025 को एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर फैसला सुनाते हुए इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी की देखरेख में सीबीआई को ट्रांसफर कर दी थी।

सरकारी मदद और सार्वजनिक बयानों पर उठाए सवाल

फरियादी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की है कि राज्य सरकार द्वारा पीड़ितों के परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि, सरकारी नौकरियां या अन्य कल्याणकारी उपाय केवल कोर्ट द्वारा तय सुरक्षा मानकों और सीबीआई के समक्ष पूरी कार्ययोजना प्रस्तुत करने के बाद ही दिए जाने की अनुमति दी जाए। ऐसा इसलिए ताकि इस आर्थिक मदद का उपयोग गवाहों को प्रभावित करने के लिए न किया जा सके।

इसके साथ ही, अर्जी में सीबीआई को निर्देश देने की मांग की गई है कि थिरु आधव अर्जुन द्वारा बीते 2 जुलाई 2026 को दिए गए विवादित सार्वजनिक बयानों के खिलाफ तत्काल शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि वे बयान सीधे तौर पर चल रही जांच में बाधा डालने और गवाहों के बयानों को बदलने का प्रयास प्रतीत होते हैं। अब इस पूरे संवेदनशील विषय पर मंगलवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर देश भर की राजनीतिक और कानूनी बिरादरी की नजरें टिकी हुई हैं।

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