Friday, August 21, 2026
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Rajnandgaon Hospital Floods: करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी पहली बारिश में डूबा बसंतपुर जिला अस्पताल; दावों की खुली पोल

Rajnandgaon Hospital Floods: राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिक निगम के बुनियादी ढांचे व तैयारियों के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है। शहर के बसंतपुर स्थित मुख्य जिला अस्पताल परिसर एक बार फिर पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। जलभराव की समस्या से निपटने के नाम पर पिछले समय में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद अस्पताल परिसर किसी टापू में तब्दील नजर आया। इस अव्यवस्था के चलते अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके तीमारदारों (परिजनों) और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

करोड़ों खर्च कर ऊंचा किया परिसर, लेकिन निकासी का रास्ता भूले

उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षों से बसंतपुर जिला अस्पताल परिसर में मानसून के दौरान जलभराव की गंभीर और पुरानी समस्या बनी हुई थी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा परिसर के धरातल को ऊंचा उठाने और ड्रेनेज (जल निकासी) सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्माण कार्य स्वीकृत कर कराया गया था। उस वक्त निगम प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि इन सुधारात्मक कार्यों के बाद अस्पताल परिसर में एक बूंद पानी नहीं रुकेगा और मरीजों को सुचारू सुविधाएं मिलेंगी।

जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई। तकनीकी लापरवाही का आलम यह रहा कि इंजीनियरों और ठेकेदारों ने अस्पताल परिसर को तो ऊंचा उठा दिया, लेकिन पानी की सुरक्षित और त्वरित निकासी के लिए कोई प्रभावी व स्थायी व्यवस्था नहीं की। नतीजा यह हुआ कि आसपास का पूरा पानी ढलान पाकर अस्पताल के मुख्य द्वारों और गलियारों की ओर जमा होने लगा।

पानी के बीच से गुजरने को मजबूर स्ट्रेचर और एम्बुलेंस

बारिश के बाद अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर आपातकालीन (इमरजेंसी) वार्ड तक कई फीट तक पानी जमा हो गया। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि आपातकालीन सेवा के तहत एम्बुलेंस से पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को घुटने भर गंदे पानी के बीच से स्ट्रेचर के सहारे जैसे-तैसे वार्ड के भीतर दाखिल कराया गया। वहीं दूसरी ओर, अस्पताल के भीतर भर्ती मरीजों के परिजन दवाइयां, भोजन और अन्य जरूरी सामान लेने के लिए बाहर जाने के दौरान इसी बदबूदार और दूषित पानी से होकर गुजरने को विवश दिखे। करोड़ों रुपये के बजट खपाने के बाद भी जिला अस्पताल की यह दुर्दशा स्थानीय प्रशासन के नियोजन और भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करती है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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