Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सबसे बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण आपातकालीन समीक्षा बैठक संपन्न हो गई है। राम मंदिर के खजाने से चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सार्वजनिक होने के बाद यह ट्रस्ट की पहली बैठक थी, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई थीं। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई कड़े और ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विवादों के केंद्र में आए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों को दो-तिहाई बहुमत के साथ आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है।
बजरंग बागड़ा और नीरज दौनेरिया संभालेंगे नई जिम्मेदारी
इस बड़े सांगठनिक फेरबदल के तहत विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिग्गज पदाधिकारी और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बजरंग बागड़ा को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया जा रहा है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले बजरंग बागड़ा वित्तीय पारदर्शिता लाने और कॉर्पोरेट फंड के प्रबंधन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, डॉ. अनिल मिश्रा के रिक्त स्थान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विहीप के कद्दावर नेता नीरज दौनेरिया को नए ट्रस्टी के रूप में बोर्ड में शामिल किया जा रहा है। शाम को होने वाली आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन नामों की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया के कारण फंसा था पेंच
बैठक दोपहर 3:30 बजे अयोध्या के प्रशासनिक भवन में शुरू हुई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय परिसर पहुंचे जरूर थे, लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए। वरिष्ठ सदस्य के. पाराशरण, नृपेंद्र मिश्रा, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि प्रशांत लोखंडे और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि संजय प्रसाद ऑनलाइन माध्यम से इस बैठक से जुड़े।
नियमों के अनुसार, केवल पद से इस्तीफा देने से ही ट्रस्ट की प्राथमिक सदस्यता समाप्त नहीं होती है। किसी भी सदस्य को बोर्ड से पूरी तरह हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ ‘कारण बताओ नोटिस’ जैसी तकनीकी विधिक प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है, जिसके कारण बैठक के भीतर लंबी रणनीतिक चर्चा करनी पड़ी।
कोषाध्यक्ष ने जताया खेद, SIT जांच की समीक्षा
बैठक के दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑडिट प्रक्रिया प्रस्तुत करते हुए दान विवाद पर गहरा खेद जताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि व्यवस्थाओं में कुछ कमियां थीं, जिन्हें समय रहते दूर नहीं किया गया और यह एक ‘बहुत बड़ी गलती’ थी। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बैंकिंग और सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक अभेद्य बनाने की बात कही। सभी ट्रस्टियों ने माना कि इस विवाद से देश-विदेश के राम भक्तों के भरोसे को ठेस पहुंची है।
चढ़ावा चोरी विवाद में अब तक की बड़ी कार्रवाई
इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 5 जून को हुई थी, जब आंतरिक ऑडिट में पहली बार खजाने से राशि गायब होने की बात सामने आई थी। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और एसओजी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्र और अविनाश शुक्ला सहित अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी अनुकल्प मिश्र ने चोरी के पैसों से करीब 2 करोड़ रुपये में 20 बीघा जमीन खरीदने की डील की थी और एक लग्जरी स्कॉर्पियो कार भी बुक कराई थी। ट्रस्ट के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार की इस त्वरित पुलिसिया कार्रवाई और चल रही जांच पर पूरा भरोसा जताया है।







